1. सफेदपोश की आड़ में छिपा ‘दरिंदा’
रामभवन कोई साधारण अपराधी नहीं, बल्कि चित्रकूट में सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर (JE) के पद पर तैनात था। समाज में सम्मानजनक पद पर रहते हुए वह अपनी पत्नी के साथ मिलकर एक ऐसा घिनौना नेटवर्क चला रहा था, जिसकी कल्पना मात्र से रूह कांप जाए।
शिकार: 5 से 16 साल के गरीब और मासूम बच्चे।
प्रलोभन: मोबाइल गेम, खिलौने, पैसे और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स का लालच देकर बच्चों को घर बुलाया जाता था।
अपराध का तरीका: पति-पत्नी मिलकर बच्चों का यौन शोषण करते थे और लैपटॉप के जरिए उनकी वीडियो और फोटो रिकॉर्ड करते थे।
सीबीआई की जांच में जो खुलासे हुए, वे चौंकाने वाले थे। यह केवल एक स्थानीय अपराध नहीं था, बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय पेडोफाइल सिंडिकेट का हिस्सा था।
ग्लोबल नेटवर्क: इंटरपोल से मिले इनपुट के बाद इस गिरोह का भंडाफोड़ हुआ।
निर्यात: ये आरोपी बच्चों के अश्लील वीडियो और फोटो चीन, अमेरिका, ब्राजील और अफगानिस्तान समेत 47 देशों में बेचते थे।
साक्ष्य: सीबीआई को एक पेनड्राइव मिली जिसमें 34 बच्चों के वीडियो और 679 आपत्तिजनक तस्वीरें थीं।
अक्टूबर 2020 में मामला दर्ज होने के बाद सीबीआई ने बेहद पेशेवर तरीके से जांच की:
गिरफ्तारी: 17 नवंबर 2020 को दोनों को दबोचा गया।
चार्जशीट: मात्र 88 दिनों के भीतर 700 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की गई।
गवाही: कोर्ट में 74 गवाहों को पेश किया गया। डिजिटल साक्ष्यों और एम्स (AIIMS) दिल्ली में हुए बच्चों के मेडिकल परीक्षण ने आरोपियों के खिलाफ केस को अभेद्य बना दिया।
अदालत ने माना कि यह मामला “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” (दुर्लभतम) श्रेणी में आता है। जहां पत्नी दुर्गावती को गवाहों पर दबाव बनाने और समझौते के लिए मजबूर करने का भी दोषी पाया गया, वहीं रामभवन मुख्य अपराधी था।
अधिवक्ता ने कोर्ट से यह भी मांग की है कि जिलाधिकारी (DM) को पत्र लिखकर प्रत्येक पीड़ित बच्चे को 10-10 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाए, ताकि उनके पुनर्वास में मदद मिल सके।