गुरुवार तक सर्वे दलों ने सात सौ से अधिक किसानों के खेतों का दौरा किया और लगभग 250 हैक्टेयर फसल प्रभावित पाई गई फिलहाल खेतों में गेहूं और सरसों की फसल पकी नहीं है बालियां ही निकल रही हैं ऐसे में क्राप कटिंग विधि से नुकसान का आकलन नहीं किया जा सकता इसलिए टीम नेत्रांकन विधि से फसल में दिख रहे नुकसान का आंकलन कर रही है
सर्वे में खेत-दर-खेत जाकर नुकसान का मापन किया जाता है टीम रैंडम रूप से कुछ हिस्से चुनती है और वहां पौधों की स्थिति देखकर नुकसान तय करती है यदि नुकसान 33 प्रतिशत या उससे अधिक होता है तो किसान मुआवजे का हकदार बनता है कम नुकसान होने पर शासन की ओर से राहत राशि नहीं मिलती
ओलावृष्टि से सबसे अधिक प्रभावित गांव कछौआ रहा अकेले यहां चार सौ किसानों के खेतों का सर्वे किया गया अन्य छह गांवों में प्रभावित किसानों की संख्या 300 थी कुल मिलाकर सात सौ किसानों के खेतों तक सर्वे दल पहुंच चुके हैं चीनोर तहसील के अन्य प्रभावित गांवों में बड़की सराय सिकरौदा भौरी खुर्दपार्क जुझारपुर और कछौआ शामिल हैं
कलेक्टर सहित प्रशासन के अफसर भी मैदान में उतर गए थे और सर्वे दलों को नुकसान का आकलन करने के आदेश दिए गए राजस्व विभाग के अफसरों के मुताबिक ओलावृष्टि से फसल नुकसान की सही स्थिति दो से तीन दिन में सामने आएगी सर्वे अंत में पंचनामा तैयार किया जाता है जिसमें किसान का नाम खसरा नंबर फसल का नाम ओलावृष्टि का समय तीव्रता कुल रकबा और क्षतिग्रस्त हिस्से का विवरण दर्ज किया जाता है सर्वे के दौरान पशु हानि होने पर उसका भी विवरण लिखा जाता है ताकि पीड़ित किसानों को उचित मुआवजा दिया जा सके