Bhopal News : मध्यप्रदेश। एम्स अस्पताल में प्लाज्मा चोरी मामले में नए खुलासे करते हुए, बागसेवनिया पुलिस ने बुधवार को अंतरराज्यीय रैकेट का भंडाफोड़ किया।
यह रैकेट एम्स अस्पताल के ब्लड बैंक से लगभग 12 लाख रुपये मूल्य के फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा (FFP) की तस्करी में शामिल था। पुलिस ने इस अपराध से जुड़े छह लोगों को गिरफ्तार किया है और आरोपियों से चोरी किए गए प्लाज्मा की 1,123 यूनिट और 8.57 लाख रुपये नकद बरामद किए हैं।
प्लाज्मा यूनिट चोरी की सूचना 29 सितंबर को मिली थी :
डीसीपी जोन-2 विवेक सिंह के अनुसार, बागसेवनिया थाने के प्रभारी निरीक्षक अमित सोनी द्वारा की गई जाँच के बाद यह सफलता मिली। एम्स ब्लड बैंक से प्लाज्मा यूनिट चोरी की सूचना 29 सितंबर को मिली थी। आउटसोर्स कर्मचारी अंकित केलकर और एक अन्य संदिग्ध के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।
पूछताछ में हुआ खुलासा :
पूछताछ के दौरान, केलकर ने खुलासा किया कि उसने अमित जाटव (25) और लकी पाठक (30) के साथ मिलकर चोरी की योजना बनाई थी, जो दोनों एक निजी ब्लड बैंक के परिचित हैं। एम्स के साथ केलकर का आउटसोर्सिंग अनुबंध 30 सितंबर को समाप्त होने वाला था, जिसके चलते उसने 1,150 एफएफपी प्लाज्मा पैकेट चुरा लिए।
प्लाज्मा 5,800 रुपये प्रति लीटर की दर से बेचा :
पुलिस ने अमित जाटव और लकी पाठक को गिरफ्तार किया, जिन्होंने चोरी किया हुआ प्लाज्मा दीपक पाठक (35) को बेचने की बात स्वीकार की, जिसने इसे ब्लड बैंक के कर्मचारी श्याम बड़गुजर (27) निवासी इंदौर और करण चव्हाण (25) निवासी औरंगाबाद को दिया। प्लाज्मा 5,800 रुपये प्रति लीटर की दर से बेचा गया।
बाद में पुलिस ने बड़गुजर और चव्हाण को गिरफ्तार कर लिया और उनके पास से 1,123 प्लाज्मा यूनिट (करीब 224 लीटर) बरामद की। वे कथित तौर पर चोरी किए गए प्लाज्मा को दवा कंपनियों को बेचने की योजना बना रहे थे, जिसका इस्तेमाल एल्ब्यूमिन और अन्य चिकित्सा उत्पाद बनाने में किया जाता था।
ये हुआ बरामद :
1,123 यूनिट 11.72 लाख रुपये मूल्य का एफएफपी प्लाज्मा
8.57 लाख रुपये अवैध बिक्री से अर्जित
एक प्लाज्मा भंडारण के लिए इस्तेमाल किया गया 27,000 रुपये मूल्य का डीप फ्रीजर
ऐसे दिया चकमा :
एम्स में तीन साल तक काम करने वाले केलकर ने अस्पताल के ब्लड बैंक के लेआउट के अपने विस्तृत ज्ञान का इस्तेमाल सुरक्षा को चकमा देने और प्लाज्मा चुराने के लिए किया।
चोरी किए गए स्टॉक को भोपाल, इंदौर, नासिक, औरंगाबाद और बीड (महाराष्ट्र) में फैले एक अंतरराज्यीय नेटवर्क के माध्यम से ले जाया और बेचा गया। पुलिस को इस रैकेट में अन्य लोगों के शामिल होने का संदेह है।