MP High Court : जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने बुधवार को राज्य के निजी मेडिकल कॉलेजों में NEET-PG दाखिले के लिए 3 सितंबर 2025 को जारी अधिसूचना पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी। मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि “50% से ज्यादा आरक्षण संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। यह न सिर्फ दूसरे राज्यों के मेधावी छात्रों के साथ भेदभाव है, बल्कि मध्य प्रदेश के उन छात्रों के साथ भी अन्याय है जिन्होंने बाहर से MBBS किया है।”
कोर्ट ने मौजूदा नियमों को खारिज करते हुए कहा कि, अखिल भारतीय कोटा 50%, NRI कोटा 15%, सेवा निवृत्त/इन-सर्विस कोटा 30%, बाकी संस्थागत वरीयता (केवल MP के निजी कॉलेज से MBBS करने वालों को) इन सबको जोड़ने से 100% के करीब आरक्षण बन गया है, जिससे सामान्य वर्ग और बाहरी राज्यों के छात्रों के लिए PG सीटें लगभग खत्म हो गई हैं। (MP High Court)
राजस्थान, उत्तर प्रदेश और पंजाब के छात्रों की याचिका पर सुनवाई करते हुए बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों (प्रदीप जैन, सौरभ चौधरी, तन्वी बहल) का हवाला दिया और कहा, “MBBS में संस्थागत वरीयता देना ठीक हो सकता है, लेकिन PG स्तर पर ऐसा करना आर्टिकल 14 का स्पष्ट उल्लंघन है। देश को सबसे योग्य डॉक्टर चाहिए, न कि राज्य-आधारित प्राथमिकता।” (MP High Court)
कोर्ट ने आगे टिप्पणी की कि “पुराना नियम था” या “सॉफ्टवेयर में दिक्कत है” जैसे बहाने किसी असंवैधानिक प्रावधान को वैधता नहीं दे सकते। अदालत ने NEET-PG काउंसलिंग को तुरंत रोक दिया और राज्य सरकार व मेडिकल एजुकेशन विभाग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अब तक मध्य प्रदेश में कुल 1062 स्टेट कोटे की PG सीटें हैं, जिनमें से ज्यादातर पर सिर्फ राज्य के निजी कॉलेजों से MBBS करने वाले ही दावा कर पा रहे थे।