Simhastha Land Pooling Case : भोपाल। उज्जैन सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के बीच मध्य प्रदेश सरकार के लैंड पूलिंग नीति को लेकर किसानों का गुस्सा फिर भड़क गया है। भारतीय किसान संघ ने नगरीय विकास एवं आवास विभाग के ताजा संशोधित आदेश को ‘भ्रामक’ और ‘गोलमाल भरा’ बताते हुए सरकार को कड़ी चेतावनी दी है। संगठन ने ऐलान किया है कि किसान अब दोबारा सड़कों पर उतरेंगे और आंदोलन की रणनीति तैयार की जा रही है।
किसान संघ के प्रदेश अध्यक्ष कमल सिंह आंजना ने कहा –
मामले में नया मोड़ तब आया जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में किसान संघ के साथ बैठक के बाद लैंड पूलिंग को पूरी तरह निरस्त करने का फैसला सुनाया था। संगठन ने इसे किसानों की जीत माना और जश्न मनाया था। लेकिन गुरुवार को जारी संशोधित आदेश ने सबकी उम्मीदें तोड़ दीं। किसान संघ के प्रदेश अध्यक्ष कमल सिंह आंजना ने उज्जैन में प्रेस कॉन्क्लेव बुलाकर कहा, “सरकार ने हमें गुमराह किया। बैठक में लिखित रूप से स्पष्ट था कि सिंहस्थ क्षेत्र में लैंड पूलिंग एक्ट पूरी तरह समाप्त होगा। लेकिन नया आदेश उलझाने वाला है। टीडीएस 8, 9, 10 और 11 स्कीम्स को खत्म कर धारा 50(1) को निरस्त करने की बात कही गई थी, जो सिर्फ संशोधन बनकर रह गया।”
आंजना ने मांग दोहराई कि उज्जैन सिंहस्थ क्षेत्र से नगर विकास योजना (टीडीएस 8, 9, 10, 11) का गजट नोटिफिकेशन रद्द हो, पूर्व की तरह अस्थायी सिंहस्थ आयोजन हो, किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएं और क्षेत्र में कोई स्थायी निर्माण न हो। उन्होंने कहा, “किसान संघ सरकार की चालाकी स्वीकार नहीं करेगा। अगर मांगें पूरी नहीं हुईं तो बड़े स्तर पर आंदोलन होगा।”
यह विवाद फरवरी से चल रहा है, जब किसान संघ ने सिंहस्थ के लिए किसानों की कृषि भूमि पर स्थायी अधिग्रहण का विरोध शुरू किया था। संगठन का तर्क था कि इससे हजारों किसानों की आजीविका खतरे में पड़ जाएगी। सरकार ने 2000 करोड़ की इस योजना को निरस्त कर किसानों के हितों का सम्मान करने का दावा किया था, लेकिन संशोधित आदेश ने फिर आग में घी डाल दिया। अब संगठन ने राज्यव्यापी स्तर पर किसानों को लामबंद करने की तैयारी शुरू कर दी है।