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Delhi Bomb Blast Case : नहीं टूटेगा अल फलाह यूनिवर्सिटी चेयरमैन जवाद सिद्दीकी का घर, अदालत ने दी राहत

Delhi Bomb Blast Case : नहीं टूटेगा अल फलाह यूनिवर्सिटी चेयरमैन जवाद सिद्दीकी का घर

Delhi Bomb Blast Case : इंदौर। दिल्ली ब्लास्ट और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में जांच के दायरे में चल रहे अल फलाह यूनिवर्सिटी (Al Falah University) के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (Madhya Pradesh High Court) की इंदौर बेंच से अस्थायी राहत मिल गई है। कोर्ट ने महू कैंटोनमेंट बोर्ड की ओर से उनके पैतृक मकान को अवैध निर्माण बताकर तीन दिन के अल्टीमेटम के साथ तोड़ने की कार्रवाई पर 15 दिनों का स्टे दे दिया। जस्टिस विवेक रूसिया की एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान बोर्ड की कार्रवाई को प्रक्रियागत रूप से दोषपूर्ण बताते हुए यह फैसला सुनाया।

नोटिस चस्पा कर तीन दिनों में खाली करने का आदेश (Delhi Bomb Blast Case)

मकान में फिलहाल अब्दुल माजिद नामक व्यक्ति और उनका परिवार रह रहा है, जिन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। जवाद सिद्दीकी के पिता स्व. हम्माद अहमद सिद्दीकी के नाम पर रजिस्टर्ड यह चार मंजिला भवन मूल रूप से ब्रिटिश काल का ग्रांट था। स्व. हम्माद ने इसे गिफ्ट डीड से जवाद को ट्रांसफर किया था, जिन्होंने बाद में अब्दुल माजिद को सौंप दिया। कैंट बोर्ड ने 19 नवंबर 2025 को नोटिस चस्पा कर तीन दिनों में खाली करने का आदेश दिया था, लेकिन अब 15 दिन की मोहलत मिल गई है। अगली सुनवाई 15 दिनों बाद होगी।

कोर्ट ने स्टे देते हुए तीन मुख्य आधार गिनाए :

– नोटिस में अवैध हिस्से का स्पष्ट उल्लेख नहीं।
– 1996-97 के पुराने नोटिसों का हवाला देना गलत।
– सुप्रीम कोर्ट की 2025 गाइडलाइंस का पालन न होना।

महू कैंट बोर्ड के सीईओ विकास कुमार विश्वोई ने बताया कि यह भवन डिफेंस मिनिस्ट्री की जमीन पर 1995-96 में बनाया गया था, जो कैंट एक्ट का उल्लंघन है। लेकिन कोर्ट ने प्रक्रिया की कमियों को देखते हुए रोक लगाई। (Delhi Bomb Blast Case)

यह विवाद इसलिए संवेदनशील है क्योंकि जवाद सिद्दीकी 18 नवंबर को ED ने गिरफ्तार किया था। एजेंसी ने दावा किया कि यूनिवर्सिटी ने 415 करोड़ का ‘प्रॉसीड्स ऑफ क्राइम’ जमा किया। दिल्ली पुलिस ने दिल्ली ब्लास्ट से जुड़े केस में भी जांच शुरू की है। उनके भाई हम्मूद अहमद सिद्दीकी को भी फ्रॉड के मामलों में गिरफ्तार किया गया। यूनिवर्सिटी पर NAAC फर्जीवाड़े के आरोप हैं। कैंट बोर्ड का एक्शन पुराना अवैध निर्माण विवाद है, लेकिन समय पर उठने से सवाल उठ रहे हैं।

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