MP News : कटनी। मध्य प्रदेश के कटनी जिले में 28 अक्टूबर को दिनदहाड़े भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा मंडल अध्यक्ष नीलू (नीलेश) रजक की गोली मारकर हत्या के आरोपी अकरम खान के अवैध मकान तोड़ने की कार्रवाई पर हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट गाइडलाइंस का हवाला देते हुए 15 दिनों की रोक लगा दी है। सोमवार को जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस रामकुमार चौबे की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि बिना ठोस प्रक्रिया के बुलडोजर एक्शन नहीं चलेगा। यदि सरकार चाहे तो डिवीजन बेंच में अपील कर सकती है। मामला अकरम खान के भाई की याचिका से जुड़ा है, जिसमें नगर परिषद के नोटिस को चुनौती दी गई थी।
हत्या का पूरा मामला (MP News)
28 अक्टूबर को कैमोर थाना क्षेत्र में बैंक ऑफ बड़ौदा के पास दो नकाबपोश बाइक सवारों – अकरम खान और प्रिंस जोसेफ – ने नीलू रजक पर ताबड़तोड़ फायरिंग की। सिर और सीने में गोली लगने से नीलू की मौके पर मौत हो गई। CCTV फुटेज में वारदात कैद हुई। पुलिस ने तुरंत दोनों को कजरवारा क्षेत्र से गिरफ्तार किया, जहां शॉर्ट एनकाउंटर में वे घायल हो गए। लापरवाही के आरोप में TI समेत दो पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया गया।
विधायक संजय पाठक ने हत्या को ‘लव जिहाद’ से जोड़ा। उनका दावा है कि नीलू स्कूल-कॉलेज जाने वाली छात्राओं पर अकरम और उसके साथियों की छेड़छाड़ का विरोध करते थे। हत्या की खबर फैलते ही भाजपा कार्यकर्ताओं ने कैमोर अस्पताल के बाहर चक्का जाम कर दिया था।
मकान तोड़ने का विवाद (MP News)
हत्या के बाद कैमोर नगर परिषद ने अकरम खान के मकान को अवैध निर्माण बताते हुए नोटिस जारी किया। सरकार की दलील थी कि मकान बिना अनुमति बना है। अकरम के भाई ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर नोटिस रद्द करने की गुहार लगाई। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट की 2025 गाइडलाइंस (बुलडोजर एक्शन पर रोक) का हवाला देते हुए 15 दिनों की स्टे दी।
कोर्ट की टिप्पणी (MP News)
बेंच ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों का पालन जरूरी है। बिना पूरी प्रक्रिया के संपत्ति तोड़ना कानूनी नहीं। यदि जरूरी हो तो डिवीजन बेंच में अपील करें।” सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकीलों ने दलील दी कि मकान पुराना है और हत्या से इसका कोई लेना-देना नहीं।
राजनीतिक रंग (MP News)
भाजपा ने स्टे को “कानूनी प्रक्रिया का सम्मान” बताया, लेकिन विपक्ष ने इसे “अपराधियों को संरक्षण” करार दिया। विधायक पाठक ने कहा, “नीलू की हत्या का बदला लेने का समय है, लेकिन कानून सबका साथ दे।” मामला अब और गरमाने की संभावना है। अगली सुनवाई 15 दिनों बाद होगी।