MP News : सतना। मध्य प्रदेश सरकार की नगरीय विकास एवं आवास राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी का परिवार ड्रग्स तस्करी के काले कारोबार में फंस गया है। सतना पुलिस ने मंत्री के सगे भाई अनिल बागरी (35 वर्ष, भरहुत नगर हरदुआ निवासी) को उसके साथी पंकज सिंह (मतहा निवासी) के साथ मिलकर 46 किलो 134 ग्राम गांजे (मूल्य करीब 9.23 लाख रुपये) की तस्करी के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। दोनों को विशेष अदालत में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया। यह गिरफ्तारी रामपुर बघेलान थाना क्षेत्र के मरोहा गांव में मुखबिर सूचना पर रविवार रात हुई।
कैसे पकड़े गए? (MP News)
पुलिस को मुखबिर से टिप मिली कि पंकज सिंह ने अपने टीन शेड के नीचे धान की बोरियों में गांजा छिपाया है। दबिश देने पर चार बोरियों से 12-12 पैकेट गांजे बरामद हुए। पूछताछ में पंकज ने कबूला कि गांजा अनिल बागरी और उसके जीजा शैलेंद्र सिंह (बांदा जेल में बंद) ने दिया था। अनिल ने भी अपना अपराध स्वीकार कर लिया। पुलिस ने कार MH 49 BB 9699 भी जब्त की, जिससे वे तस्करी कर रहे थे। मामला NDPS एक्ट के तहत दर्ज है।
पहले बहनोई, अब भाई (MP News)
यह गिरफ्तारी मंत्री के परिवार के लिए दूसरा झटका है। 3 दिसंबर को ही प्रतिमा का बहनोई शैलेंद्र सिंह उर्फ सिम्मू को उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में गांजा तस्करी के मामले में पकड़ा गया था। वह अभी बांदा जेल में बंद है। पुलिस का शक है कि जीजा-साले मिलकर एक ही नेटवर्क चला रहे थे। रैगांव की पूर्व विधायक कल्पना वर्मा ने मंत्री पर “रिश्तेदारों को संरक्षण” देने का आरोप लगाया है।
मंत्री का भड़कना वायरल (MP News)
खजुराहो के महाराजा कन्वेंशन सेंटर से निकलते समय जब पत्रकारों ने अनिल की गिरफ्तारी पर सवाल किया तो प्रतिमा भड़क गईं। उन्होंने कहा, “फालतू बात क्यों करते हो तुम लोग? जबरदस्ती की बात क्यों कर रहे हो?” यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। कांग्रेस ने BJP सरकार पर निशाना साधा – “मंत्रियों के रिश्तेदारों को संरक्षण मिल रहा है, लेकिन आम जनता को न्याय नहीं।”
एडिशनल SP प्रेमलाल धुर्वे ने बताया, “गांजा धान की बोरियों में छिपाया था। पूछताछ में नेटवर्क का खुलासा हुआ। अब कॉल डिटेल, बैंक ट्रांजेक्शन और पुराने केस खंगाले जा रहे हैं। कोई बच नहीं पाएगा।” अनिल और पंकज को 19 दिसंबर तक रिमांड पर लिया गया है। मामला राजनीतिक रूप से गरमाता जा रहा है। विपक्ष मांग कर रहा है कि मंत्री का इस्तीफा हो और निष्पक्ष जांच हो।