Jabalpur News : जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की युगलपीठ (जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस रामकुमार चौबे) ने विधि एवं विधायी कार्य विभाग के अंडर सेक्रेटरी और सरकारी अधिवक्ता को व्यक्तिगत रूप से तलब किया था। कारण था – विभाग ने हाईकोर्ट से “अनूपपुर के एक अतिरिक्त लोक अभियोजक के खिलाफ कार्रवाई के लिए निर्देश” मांगे थे।
कोर्ट ने इसे “अपना बोझ कोर्ट पर डालने की कोशिश” बताते हुए कड़ी नाराजगी जताई थी और पूछा था कि “विधि विभाग को यह भी नहीं पता कि उसे क्या करना है?”
माफीनामा रिकॉर्ड में लिया गया (Jabalpur News)
गुरुवार को सुनवाई के दौरान दोनों अफसर हाजिर हुए और लिखित अंडरटेकिंग देकर बिना शर्त माफी मांगी। उन्होंने स्वीकार किया कि विधि विभाग का हाईकोर्ट को किसी भी कार्रवाई के लिए निर्देश देने का कोई अधिकार नहीं है। युगलपीठ ने माफीनामा रिकॉर्ड में लिया और मामले को आगे बढ़ाया।
मामला क्या था? (Jabalpur News)
अनूपपुर में एक हत्या के केस में दो गवाहों के 161 CrPC बयान रिकॉर्ड में थे, लेकिन अतिरिक्त लोक अभियोजक ने उनसे कोई सवाल नहीं पूछा। अपील में इसे “ईमानदारी से ड्यूटी न निभाना” बताया गया। हाईकोर्ट ने 3 हफ्ते में जांच रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन विधि विभाग ने कोर्ट से ही “कार्रवाई के निर्देश” मांग लिए थे।
कोर्ट ने इसे गंभीर मानते हुए अफसरों को तलब किया और अब माफी के बाद विभाग को अपनी गलती सुधारने का मौका दिया है। यह घटना सरकारी महकमे में कोर्ट के प्रति जवाबदेही और समझ की कमी को उजागर कर रही है।