पंकज त्रिपाठी के लिए विशेष और भावुक पल
पंकज ने इस उपलब्धि को अपने जीवन का खास पल बताया और कहा, “भारत रंग महोत्सव भारतीय थिएटर की आत्मा जैसा है। यहां अपने नाटक का चयन होना मुझे अपनी जड़ों से दोबारा जोड़ देता है। थिएटर ही वह जगह है, जहां से मैंने अभिनय की असली सीख ली और राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) ने मुझे अनुशासन, सच्चाई और कला के प्रति सम्मान सिखाया।”
‘लाइलाज’: मेहनत, विश्वास और परिवार का संगम
‘लाइलाज’ को पंकज और उनकी पत्नी मृदुला त्रिपाठी ने अपने थिएटर बैनर ‘रूपकथा रंगमंच’ के तहत तैयार किया। पंकज ने कहा, “अपने नए थिएटर मंच की पहली प्रस्तुति को इतना बड़ा और सम्मानित मंच मिलना मेरे लिए किसी सपने के पूरा होने जैसा है। यह भले ही एक साधारण कहानी हो, लेकिन इसके पीछे कई कलाकारों और तकनीकी टीम की कड़ी मेहनत और थिएटर के प्रति गहरा विश्वास छिपा है।”
दस साल बाद थिएटर में वापसी और बेटी का पहला कदम
‘लाइलाज’ को लेखक और निर्देशक फैज मोहम्मद खान द्वारा लिखा और निर्देशित किया गया है। पंकज के लिए यह नाटक इसलिए भी खास है क्योंकि इसके जरिए वह करीब दस साल बाद थिएटर मंच पर वापसी कर रहे हैं। सबसे खास बात यह है कि उनकी बेटी आशी भी पहली बार थिएटर मंच पर कदम रख रही हैं। पंकज ने कहा, “बेटी के साथ मंच साझा करना मेरे जीवन के सबसे यादगार अनुभवों में से एक है। मैं इसे सिर्फ अभिनय नहीं, बल्कि थिएटर को एक सच्ची भेंट मानता हूं।”
मृदुला त्रिपाठी की खुशी और थिएटर की ताकत
मृदुला ने कहा, “जब मैंने रूपकथा रंगमंच की शुरुआत की थी, मेरा मकसद बड़े मंच की तलाश नहीं, बल्कि ईमानदारी और सच्चे भाव से कहानियां कहना था। भारत रंग महोत्सव जैसे मंच पर ‘लाइलाज’ का चुना जाना बेहद संतोषजनक और हौसला बढ़ाने वाला है।” उन्होंने अपनी बेटी के पहले कदम को लेकर कहा, “यह हमारे लिए बेहद भावुक पल है। मैं दर्शकों, महोत्सव और उन सभी कलाकारों का आभार व्यक्त करती हूं, जो आज भी थिएटर की ताकत पर विश्वास रखते हैं। थिएटर आज भी लोगों को जोड़ने, भावनाओं को छूने और समाज को आईना दिखाने की ताकत रखता है।