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न शोर, न भीड़, न फोटो की होड़! फरवरी में भारत की इन 5 जगहों पर असली 'शांति' का करें अनुभव; देखें पूरी लिस्ट


नई दिल्ली । फरवरी यात्रा भारत यात्रा का मतलब सिर्फ जगह बदलना नहीं, बल्कि शोर और जल्दबाजी से थोड़ी दूरी बनाना होता है. फरवरी इसलिए खास लगता है क्योंकि यह किसी बड़े उत्सव या पीक सीजन का समय नहीं होता. इस बीच के समय में जगहें अपना असली स्वभाव दिखाती हैं और यात्री बिना किसी दबाव के उन्हें महसूस कर पाते हैं. न ज्यादा भीड़, न फोटो लेने की होड़ और न ही किसी ट्रेंड को फॉलो करने की मजबूरी.

कल्पा

हिमाचल प्रदेश के कल्पा में फरवरी का माह बेहद शांत होता है. इस समय न सेब के बागानों में चहल-पहल होती है और न ही पर्यटकों की भीड़. बर्फ धीरे-धीरे पिघल रही होती है, आसमान साफ होता है और किन्नौर कैलाश की चोटियां दूर से दिखाई देती हैं. यहां की सुबह बिना शोर के आती है और यही चुप्पी मन को भीतर तक सुकून देती है.

तीर्थन घाटी
उत्तराखंड की तीर्थन घाटी को लोग आमतौर पर ट्रेकिंग के लिए जानते हैं, लेकिन फरवरी में यह जगह एक संतुलित शांति देती है. इस समय नदी शांत रहती है, जंगल डरावने नहीं लगते और गांवों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी सहज रूप से चलती रहती है. यहां रहकर यह एहसास होता है कि शांति खालीपन नहीं बल्कि एक स्थिर लय होती है.

गोकर्ण

गोवा की भीड़ से दूर, फरवरी में कर्नाटक का गोकर्ण खासतौर पर ओम बीच के आगे का इलाका एक अलग ही अनुभव देता है. यहां समुद्र देखने से ज़्यादा सुनने जैसा लगता है. न ज्यादा नमी परेशान करती है और न पर्यटकों की भीड़. बस लहरों की आवाज़ और नमकीन हवा का हल्का सा स्पर्श मन को हल्का कर देता है.

मंडावा

राजस्थान का मंडावा फरवरी में अपने शांत रूप में दिखाई देता है. शेखावाटी की हवेलियां, खाली गलियां और धीमी दोपहरें किसी पुराने दौर में ले जाती हैं. यहां सुकून प्रकृति से नहीं बल्कि समय की धीमी रफ्तार से मिलता है, जैसे दिन खुद कह रहा हो कि जल्दी की कोई ज़रूरत नहीं है.

माजुली

असम का माजुली फरवरी में बेहद संतुलित लगता है. ब्रह्मपुत्र शांत रहती है और सत्रों में बिना किसी दिखावे के गतिविधियां चलती रहती हैं. यहां बैठकर चुप रहना भी एक तरह की आध्यात्मिकता जैसा महसूस होता है, जो पहाड़ या मंदिर से अलग लेकिन उतनी ही गहरी होती है.

इन जगहों में क्या समानता है

आध्यात्मिक यात्रिक और पिलग्रिम महादेवा ट्रैवल के चीफ जुग्ग्नु के अनुसार इन सभी जगहों में फरवरी में कुछ भी खास नहीं होता और शायद यही उन्हें खास बनाता है. न मौसम चरम पर होता है, न पर्यटक. न कुछ मिस करने का डर और न कुछ साबित करने की ज़रूरत. यही सुकून की असली परिभाषा है.

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