रायपुर। छत्तीसगढ़ में शुक्रवार को कुल 47 लाख रुपए के इनाम वाले 9 माओवादियों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। अधिकारियों ने बताया कि इसके साथ ही रायपुर पुलिस रेंज अब नक्सलियों की मौजूदगी से पूरी तरह मुक्त हो गई है। रायपुर रेंज के धमतरी और गरियाबंद जिलों तथा ओडिशा के नुआपड़ा जिले में सक्रिय सभी सूचीबद्ध कैडर या तो मारे गए हैं या सरेंडर कर चुके हैं। सरेंडर करने वाले माओवादी कैडरों ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के समक्ष हथियार भी सौंप दिए। आईजी अमरीश मिश्रा ने बताया कि आत्मसमर्पण के पीछे माओवादी विचारधारा से मोहभंग, जंगलों में जीवन की कठिनाइयां और राज्य सरकार की पुनर्वास नीति का बड़ा प्रभाव रहा। हालांकि बस्तर रेंज और राजनांदगांव के कुछ हिस्सों में अभी भी माओवादी गतिविधियां जारी हैं।
इनामी माओवादियों का विवरण
9 में से दो महिलाएं हैं। सीतानदी एरिया कमेटी की सचिव ज्योति उर्फ जैनी 28 और डिविजनल कमेटी सदस्य उषा उर्फ बलम्मा 45 पर 8-8 लाख रुपए का इनाम था। बाकी छह कैडरों रामदास मरकाम 30 रोनी उर्फ उमा 25 निरंजन उर्फ पोडिया 25 सिंधु उर्फ सोमादी 25 पुनेम 18 पर 1 लाख रुपए का इनाम था।
हथियारों की सौंपाई
सरेंडर करने वाले माओवादियों ने दो इंसास राइफल, दो एसएलआर, एक कार्बाइन और एक मजल-लोडिंग बंदूक सहित कई हथियार पुलिस को सौंपे।
छत्तीसगढ़ में बढ़ता आत्मसमर्पण
इस साल अब तक छत्तीसगढ़ में कुल 189 माओवादियों ने हथियार डाले हैं। 19 जनवरी को 45 लाख के इनाम वाले 9 माओवादियों ने गरियाबंद में सरेंडर किया था, जबकि 15 जनवरी को बीजापुर में 52 माओवादी 1.41 करोड़ से अधिक के इनाम ने आत्मसमर्पण किया। सरकार के आंकड़ों के अनुसार 2025 में अब तक 1500 से अधिक माओवादियों ने हथियार डाले हैं।