प्रशासनिक अनदेखी ने किया मजबूर इस आक्रोश की जड़ें महीनों पुरानी हैं। बिहार गांव की महिलाएं लंबे समय से गांव में अवैध रूप से कच्ची शराब बनाने और उसे बेचे जाने का विरोध कर रही थीं। शराब के कारण न केवल गांव का माहौल खराब हो रहा था, बल्कि घरेलू हिंसा और आर्थिक तंगी ने भी परिवारों को बर्बाद करना शुरू कर दिया था। महिलाओं का आरोप है कि उन्होंने जिला मुख्यालय पर जनसुनवाई से लेकर आबकारी विभाग तक कई बार लिखित और मौखिक शिकायतें कीं, लेकिन रसूखदार शराब माफियाओं के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। विभागीय सुस्ती ने अंततः महिलाओं को खुद मोर्चा संभालने पर मजबूर कर दिया।
सरेराह निकाला सबक सिखाने वाला जुलूस बीते दिन जब गांव का ही एक युवक अवैध रूप से शराब तैयार कर खुलेआम बेच रहा था, तब गांव की दर्जनों महिलाओं ने उसे रंगे हाथों दबोच लिया। गुस्से से भरी महिलाओं ने पहले उसे जमकर फटकार लगाई और फिर चप्पलों की एक माला तैयार कर उसके गले में डाल दी। इसके बाद महिलाओं ने युवक को पूरे गांव की गलियों में घुमाया और नारेबाजी की। इस घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें महिलाएं यह संदेश देती नजर आ रही हैं कि यदि वर्दी अपना फर्ज नहीं निभाएगी, तो उन्हें ही समाज की शुद्धि के लिए आगे आना होगा।
खौफ में माफिया चर्चा में साहस जुलूस निकाले जाने के दौरान गांव में अफरा-तफरी का माहौल रहा, लेकिन किसी ने भी महिलाओं को रोकने की हिम्मत नहीं की। यह घटना अन्य अवैध कारोबारियों के लिए एक कड़ा संदेश बन गई है। हालांकि कानूनी जानकारों का मानना है कि इस तरह कानून हाथ में लेना सही नहीं है, लेकिन स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जब रक्षक ही मौन हो जाएं, तो पीड़ित के पास इसके अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। फिलहाल इस वायरल वीडियो के बाद पंधाना पुलिस मामले की जांच की बात कह रही है, लेकिन असली सवाल अब भी बरकरार है—क्या अब आबकारी विभाग की नींद खुलेगी?