नई दिल्ली। पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में हालात बेहद गंभीर हैं। बीते दिनों विद्रोहियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़पों में 145 विद्रोही और 17 सैनिकों की मौत हो गई। घटनाओं की शुरुआत विद्रोहियों के हमलों से हुई, जिसमें कम से कम 31 लोग मारे गए। इसके जवाब में पाकिस्तानी सेना ने व्यापक सैन्य अभियान शुरू किया, जो अभी भी जारी है।
सुरक्षा स्थिति और प्रतिबंध
बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सरफराज बुगती ने बताया कि पिछले 40 घंटों में आतंकवाद विरोधी अभियानों में 145 आतंकवादी और 17 सुरक्षा कर्मियों की जान गई। सभी आतंकवादियों के शव अधिकारियों के कब्जे में हैं और पहचान की प्रक्रिया जारी है सुरक्षा कारणों से इंटरनेट और ट्रेन सेवाएं बंद कर दी गई हैं, साथ ही कई सड़क मार्ग भी बंद हैं। क्वेटा और आसपास के बाजारों में सन्नाटा पसरा है।
आतंकवादी गतिविधियां और अभियान
आतंकवादी गतिविधियां और अभियान
बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के लड़ाकों ने जेलों, सेना के ठिकानों और सरकारी कार्यालयों को निशाना बनाया। डिप्टी डिस्ट्रिक्ट कमिश्नर को भी किडनैप किया गया। पाकिस्तान सेना ने बताया कि आतंकवादियों ने आम नागरिकों पर भी हमला किया, जिसमें महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों समेत 18 लोग मारे गए। अभियान में 15 सैनिकों की भी मौत हुई। सेना ने कहा कि क्वेटा, मस्तुंग, नुश्की, दलबंदीन, खरान, पंजगुर, तुम्प, ग्वादर और पसनी में आतंकवादियों की गतिविधियों को नाकाम किया गया। तीन आत्मघाती हमलावरों समेत 92 आतंकवादियों को मुठभेड़ में मार गिराया गया।
मुख्यमंत्री और खुफिया जानकारी
मुख्यमंत्री बुगती ने कहा कि खुफिया एजेंसियों ने पहले ही क्वेटा में बड़े हमले की चेतावनी दी थी। शनिवार रात आतंकवादियों ने पुलिस और सीमावर्ती जवानों समेत सुरक्षा बलों और नागरिकों पर 12 अलग-अलग स्थानों पर हमला किया। क्वेटा में दो आत्मघाती हमलावरों को भी मार गिराया गया।
भारत ने आरोप खारिज किए
भारत ने आरोप खारिज किए
पाकिस्तान ने हिंसा का ठीकरा भारत पर फोड़ने की कोशिश की, लेकिन भारत ने इसे पूरी तरह खारिज किया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह केवल पाकिस्तान की रणनीति है, जो अपनी घरेलू विफलताओं और बलूचिस्तान में उत्पीड़न से ध्यान हटाने के लिए भारत का नाम ले रहा है।