नकली पश्मीना देखने में बिल्कुल असली जैसा लग सकता है, लेकिन कुछ आसान जांच के जरिए इसकी सच्चाई पहचानी जा सकती है। अगर आप भी महंगी पश्मीना शॉल खरीदने की सोच रहे हैं, तो इन बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
ऊन का स्रोत पहचानें
असली पश्मीना लद्दाख की ऊंचाई वाले इलाकों में पाई जाने वाली चांगथांगी बकरियों के अंडरकोट से बनाया जाता है। अत्यधिक ठंड के कारण इनके रेशे बेहद महीन, मुलायम और गर्म होते हैं। यही खासियत पश्मीना को दूसरी ऊन से अलग बनाती है।
वजन से करें जांच
शुद्ध पश्मीना बेहद हल्का होता है। आमतौर पर पूरा पश्मीना शॉल लगभग 180 ग्राम के आसपास होता है, जबकि स्टोल का वजन करीब 90 से 100 ग्राम तक रहता है। अगर शॉल हाथ में भारी महसूस हो, तो वह नकली या मिश्रित हो सकता है।
बर्न टेस्ट से पहचान
पश्मीना की असलियत जांचने का एक पुराना तरीका बर्न टेस्ट है। शॉल के किनारे से निकाले गए धागे को जलाने पर असली पश्मीना बालों की तरह धीरे जलता है और राख बन जाता है। वहीं नकली या सिंथेटिक धागा प्लास्टिक की तरह पिघलता है और तेज बदबू देता है।
बुनावट और फिनिशिंग पर नजर डालें
असली पश्मीना पूरी तरह हाथ से बुना जाता है। इसलिए उसकी बुनावट में हल्की असमानता हो सकती है। अगर शॉल मशीन से बनी तरह बहुत ज्यादा परफेक्ट और एकसमान दिखे, तो वह नकली होने का संकेत हो सकता है।
जीआई टैग जरूर देखें
खरीदारी के समय पश्मीना शॉल पर जीआई टैग की मांग जरूर करें। यह टैग उसकी प्रामाणिकता और मूल स्थान की पुष्टि करता है और बताता है कि शॉल वास्तव में कश्मीर या लद्दाख क्षेत्र की पारंपरिक पश्मीना है।विशेषज्ञों के अनुसार, पश्मीना शॉल खरीदते समय जल्दबाजी से बचना चाहिए। सही जानकारी और थोड़ी सतर्कता आपको नकली से बचा सकती है और आपकी महंगी खरीद को सही निवेश बना सकती है।