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लेट मैरिज: मजबूरी नहीं, आज के युवाओं का सोच-समझकर लिया गया फैसला..


नई दिल्ली। आज की युवा पीढ़ी के लिए शादी अब केवल एक सामाजिक रिवाज़ भर नहीं रही। लेट मैरिज यानी 30 वर्ष की उम्र के बाद विवाह करना धीरे-धीरे एक सामान्य और स्वीकार्य ट्रेंड बनता जा रहा है। इसकी जड़ में करियर की महत्वाकांक्षा व्यक्तिगत आज़ादी और जीवन को अपने तरीके से जीने की चाह छिपी है।जहाँ पहले समय पर शादी को सफलता का पैमाना माना जाता था वहीं अब युवा खुद को पहले मानसिक आर्थिक और भावनात्मक रूप से तैयार करना ज़रूरी समझते हैं।

आखिर क्यों बढ़ रहा है लेट मैरिज का चलन
करियर को प्राथमिकता आज के युवा पहले अपनी पढ़ाई नौकरी बिज़नेस या स्टार्टअप में खुद को स्थापित करना चाहते हैं। वे मानते हैं कि मजबूत करियर एक स्थिर पारिवारिक जीवन की नींव है।

आर्थिक स्वतंत्रता की चाह
शादी से पहले आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होना अब एक सामान्य सोच बन गई है। युवाओं का मानना है कि वित्तीय स्थिरता रिश्तों में तनाव को कम करती है।

व्यक्तिगत आज़ादी और आत्मनिर्भरता
समाजिक दबाव अब पहले जैसा नहीं रहा। शादी को अब “ज़रूरी कदम” नहीं बल्कि एक व्यक्तिगत चुनाव के रूप में देखा जाने लगा है।

सही साथी की तलाश
आज की पीढ़ी भावनात्मक समझ मानसिक मेल और समान सोच को रिश्ते की सबसे बड़ी नींव मानती है। जल्दबाज़ी की जगह समझदारी को महत्व दिया जा रहा है।

समाज का बदला नजरिया
जहाँ कभी 25 से 28 की उम्र तक शादी को आदर्श माना जाता था वहीं अब परिवार और माता-पिता भी धीरे-धीरे इस बदलाव को स्वीकार कर रहे हैं। सोशल मीडिया सेलेब्रिटी लाइफस्टाइल और वैश्विक सोच ने इस ट्रेंड को सामान्य बनाने में अहम भूमिका निभाई है।

चुनौतियाँ भी हैं लेकिन सोच और मजबूत
लेट मैरिज के साथ कुछ चुनौतियाँ भी जुड़ी हैं जैसे जैविक सीमाएं पारिवारिक दबाव और सामाजिक टिप्पणियां। इसके बावजूद युवा इसे किसी समझौते की बजाय जीवन की प्राथमिकताओं से जुड़ा फैसला मान रहे हैं।लेट मैरिज आज केवल करियर का परिणाम नहीं बल्कि एक जागरूक स्वतंत्र और संतुलित निर्णय बन चुका है। यह दर्शाता है कि आज के युवा अपनी ज़िंदगी में सुकून स्थिरता और समझदारी को सबसे ऊपर रख रहे हैं।

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