साल 2000 में फिल्म ‘रिफ्यूजी’ से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अभिषेक ने स्वीकार किया कि 25 साल बीत जाने के बाद भी पिता से उनकी तुलना का दबाव कम नहीं हुआ है। अब 50 वर्ष के हो चुके अभिनेता ने माना कि लगातार मिलती सार्वजनिक असफलताएं और आलोचनाएं किसी भी इंसान को मनोवैज्ञानिक रूप से प्रभावित करती हैं। उन्होंने कहा कि जब आप हफ्ते दर हफ्ते जनता के बीच असफल साबित होते हैं, तो नकारात्मकता से दूर रहना और निराशावादी न होना बेहद मुश्किल हो जाता है। हालांकि, उन्होंने कड़वाहट पालने के बजाय हमेशा अपने काम पर ध्यान देने और अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश की है।
अमिताभ बच्चन द्वारा उनकी प्रशंसा किए जाने पर अभिषेक ने बहुत ही मानवीय दृष्टिकोण साझा किया। उन्होंने कहा कि दुनिया अक्सर उनके पिता को एक ‘लार्जर देन लाइफ’ व्यक्तित्व के रूप में देखती है और मानती है कि उन्हें एक सामान्य इंसान की तरह व्यवहार करने की अनुमति नहीं है। लेकिन वास्तविकता यह है कि वह भी एक इंसान हैं, एक पिता हैं और एक दादा हैं। उन्हें भी अपने बच्चों की उपलब्धि पर गर्व महसूस करने और एक सामान्य माता-पिता की तरह प्रतिक्रिया देने का पूरा हक है।
अभिषेक ने यह भी स्पष्ट किया कि उनके माता-पिता, अमिताभ और जया बच्चन, उनके बॉक्स ऑफिस आंकड़ों के बजाय उनकी मेहनत और प्रयासों पर गर्व करते हैं। उनके लिए सफलता का पैमाना हिट फिल्में नहीं, बल्कि ईमानदारी से किया गया काम है। वर्कफ्रंट की बात करें तो हाल ही में ‘हाउसफुल 5’ में नजर आए अभिषेक अब बड़े पर्दे पर धमाका करने को तैयार हैं। वह शाहरुख खान और सुहाना खान की बहुचर्चित फिल्म ‘किंग’ में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते दिखेंगे, जिससे दर्शकों को काफी उम्मीदें हैं।