हाईकोर्ट ने आदेश में स्पष्ट किया कि घटना के कुछ ही दिनों बाद मृतक द्वारा आत्महत्या करना अभियोजन पक्ष के तर्क को मजबूत करता है। कोर्ट ने यह भी देखा कि गवाहों को प्रभावित करने और कथित घटनास्थल से हथियार की बरामदगी न होने के कारण हिरासत में पूछताछ आवश्यक है।मामला मुरैना के सिविल लाइन थाने में पदस्थ एसआई प्रीति जादौन और उनके मंगेतर ग्वालियर निवासी एडवोकेट मृत्युंजय सिंह चौहान से जुड़ा है। 14-15 दिसंबर 2025 की रात मृत्युंजय ने गोला का मंदिर थाना क्षेत्र स्थित अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना की जानकारी 15 दिसंबर को सामने आई थी।
पुलिस जांच में सामने आया कि 12 दिसंबर को मृतक मुरैना पुलिस लाइन स्थित प्रीति जादौन के सरकारी क्वार्टर पहुंचे थे। वहां मृतक ने एक आवेदन लिखा जिसे जांच एजेंसियां अघोषित सुसाइड नोट मान रही हैं। आवेदन में आरोप था कि महिला एसआई और क्वार्टर में मौजूद आरक्षक अराफात खान ने उनके साथ मारपीट की। मृतक ने इस घटना की शिकायत सिविल लाइन और सिटी कोतवाली थाने में दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन उल्टे महिला एसआई के प्रभाव के चलते उनके खिलाफ ही एफआईआर दर्ज कर दी गई।
हाईकोर्ट में बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि मामला निजी संबंधों में तनाव का है और मृतक ने जबरन सरकारी आवास में प्रवेश किया। हालांकि शासकीय अधिवक्ता ने मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड, टावर लोकेशन, ऑडियो वीडियो साक्ष्य और मृतक की मां के बयान को आधार बनाकर आरोपों की पुष्टि की। कोर्ट ने इन तथ्यों को गंभीर मानते हुए अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया।
इस बीच, ग्वालियर पुलिस द्वारा की गई दबिश के दौरान एसआई प्रीति जादौन और आरक्षक अराफात खान अपने आवास से अनुपस्थित पाए गए। पुलिस की तलाश जारी है और मामला न्यायिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।