बोर्ड ने परीक्षा गाइडलाइन जारी करते समय ही सभी शिक्षकों और कर्मचारियों की सेवा को आवश्यक सेवा घोषित कर दिया था। यानी ड्यूटी लगने के बाद यदि कोई कर्मचारी ड्यूटी से इनकार करता है या अपनी जगह उपस्थित नहीं होता है तो उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है। यह कदम सुनिश्चित करता है कि परीक्षा समय पर सुचारू रूप से आयोजित हो और किसी भी प्रकार की अनियमितता न हो।
शिक्षक स्वास्थ्य या अन्य निजी कारणों का हवाला देकर ड्यूटी से नाम हटवाते हैं या मौके पर नहीं पहुंचते, लेकिन इस बार कोई बहाना नहीं चलेगा। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी कर्मचारी को ड्यूटी से छूट चाहिए तो उसे वैध प्रमाण देना होगा। ऐसा न करने पर मध्य प्रदेश सिविल सेवा आचरण नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
परीक्षा केंद्रों पर पर्यवेक्षकों, केंद्राध्यक्षों और सहायक केंद्राध्यक्षों की उपस्थिति शत-प्रतिशत अनिवार्य होगी। संवेदनशील और अति-संवेदनशील परीक्षा केंद्रों पर विशेष नजर रखी जाएगी ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी या व्यवधान न हो। बोर्ड अधिकारियों ने कहा है कि इस बार परीक्षा की निगरानी और सुरक्षा कड़ी होगी और सभी कर्मचारियों को अपनी जिम्मेदारी गंभीरता से निभानी होगी।परीक्षा से जुड़े कर्मचारियों और शिक्षकों को समय पर सूचना दी जा चुकी है। बोर्ड ने यह भी चेतावनी दी है कि ड्यूटी से गैरहाजिरी या अवहेलना करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। परीक्षा के सुचारू संचालन के लिए यह कदम अनिवार्य और महत्वपूर्ण है।