राजगढ़। कलेक्टर डॉ. गिरीशकुमार मिश्रा के निर्देशन में परंपरागत खेती के तौर-तरीकों को पीछे छोड़ते हुए राजगढ़ जिले के किसानों ने आधुनिक कृषि की दिशा में एक बड़ी छलांग लगाई है। अंकुरण फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी मऊ ने जिले में पहली बार ड्रोन तकनीक का उपयोग कर 2500 एकड़ भूमि पर फसलों का उपचार (स्प्रे) कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है।
कंपनी के संचालक श्याम राजपूत ने बताया कि कृषि ड्रोन का उपयोग केवल एक नवाचार नही, बल्कि किसानों की बड़ी समस्याओं का समाधान है। इससे समय की बचत के साथ पूरी फसल में एक समान दवा का छिड़काव होता है, जिससे बर्बादी रुकती है। घने क्षेत्रों में भी स्प्रे संभव है,जहां हस्तचालित पंप के साथ जाना मुश्किल था। छिड़काव के दौरान किसानों को जहरीले जीवों और कीटनाशकों के सीधे शारीरिक संपर्क से होने वाले खतरों से सुरक्षा मिली है।
कंपनी के तकनीकी ऑपरेटर नीरज राजपूत ने बताया कि रबी सीजन में टीम ने 3 अत्याधुनिक ड्रोन्स की मदद से सरसों, चना और मसूर जैसी फसलों को कवर किया है, जिसमें 2500 एकड़ का यह सफर तो महज एक शुरुआत है, हमारा लक्ष्य अगले साल दस हजार एकड़ तक पहुंचना है।वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी सारंगपुर राजेश राजपूत ने बताया कि कृषि ड्रोन तकनीक का जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन उत्साहजनक है। खेतों में ड्रोन से फसलों पर छिड़काव के काफी सकारात्मक और प्रभावी परिणाम देखने को मिल रहे है। इससे न केवल कीटनाशकों का सटीक उपयोग सुनिश्चित हो रहा है, बल्कि फसल की गुणवत्ता में भी सुधार आ रहा है।
उपसंचालक कृषि सचिन जैन का कहना है कि राजगढ़ जिले में ड्रोन तकनीक के माध्यम से किया जा रहा यह नवाचार कृषि क्षेत्र में एक नई क्रांति ला रहा है। तकनीक के इस समावेश से निश्चित ही हमारे जिले के किसान अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपना रहे है।शासन की मंशा के अनुरूप यह कदम किसानों की आय बढ़ाने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने में सहायक सिद्ध होगा।