इस कॉरिडोर की महत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्तमान में राजीव गांधी चौराहे से LIG तक का जो सफर भारी ट्रैफिक के कारण 40 से 45 मिनट ले लेता है, इस कॉरिडोर के बनने के बाद वह महज 15 मिनट में सिमट जाएगा। यह न केवल लोगों के कीमती समय की बचत करेगा, बल्कि ईंधन की खपत और प्रदूषण को कम करने में भी मील का पत्थर साबित होगा।
प्रोजेक्ट के तकनीकी पहलुओं पर गौर करें तो इस पूरे रूट पर तीन विशाल रोटरी बनाई जाएंगी, जो ट्रैफिक के सुगम प्रबंधन के लिए LIG, शिवाजी वाटिका और नवलखा पर स्थित होंगी। इसके अलावा, गिटार चौराहा और व्हाइट चर्च रोड जैसे महत्वपूर्ण जंक्शनों पर कनेक्टिंग आर्म्स (रैम्प) दिए जाएंगे, ताकि आसपास की कॉलोनियों और अंदरूनी सड़कों से आने वाला ट्रैफिक भी बिना किसी बाधा के सीधे कॉरिडोर पर चढ़ सके। हालांकि, पहले इसे 6 लेन बनाने का विचार था, लेकिन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद इसे 4 लेन करने का निर्णय लिया गया है।
दिलचस्प बात यह है कि यह प्रोजेक्ट पिछले करीब 4 सालों से फाइलों और तकनीकी उलझनों में अटका हुआ था। साल 2009 में केंद्र से हरी झंडी मिलने के बाद कई बाधाएं आईं, लेकिन अब पीडब्ल्यूडी (PWD) विभाग ने इसे धरातल पर उतारने की पूरी तैयारी कर ली है। वर्तमान में प्रस्तावित रूट पर मिट्टी की जांच (Soil Testing) का काम तेजी से चल रहा है और 15 फरवरी से कॉरिडोर की नींव रखने का मुख्य काम शुरू कर दिया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, इस विशाल निर्माण कार्य के दौरान ट्रैफिक को व्यवस्थित रखने के लिए विशेष मैनेजमेंट प्लान भी तैयार किया गया है।
सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो अगले 2 सालों के भीतर यह कॉरिडोर बनकर तैयार हो जाएगा। इंदौर के विकास में यह एलिवेटेड रोड न केवल एक नई पहचान जोड़ेगी, बल्कि शहर के बढ़ते विस्तार और भविष्य की ट्रैफिक जरूरतों को पूरा करने में रीढ़ की हड्डी साबित होगी।