अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के अवैध तेल और पेट्रोकेमिकल निर्यात को रोकने के लिए अधिकतम दबाव की नीति पर कायम हैं। अमेरिका ने 14 जहाजों को निशाना बनाया है, जिन पर ईरानी तेल ढोने का आरोप है। इनमें तुर्की, भारत और यूएई के झंडे वाले जहाज भी शामिल हैं। इसके अलावा 15 कंपनियों और 2 व्यक्तियों पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। अब इन जहाजों और संस्थाओं से जुड़े कोई भी लेन-देन अमेरिका में अवैध माना जाएगा।
ट्रंप नीति जारी
अमेरिका पहले भी ईरान पर इसी तरह के प्रतिबंध लगाता रहा है। इनका उद्देश्य ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बनाकर उसे अपने परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों में बदलाव के लिए मजबूर करना है। दिलचस्प बात यह है कि यह घोषणा ऐसे समय हुई जब ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि ओमान में बातचीत का माहौल सकारात्मक था। बावजूद इसके अमेरिका ने दबाव की नीति में कोई ढील नहीं दी।
तनाव की पृष्ठभूमि
ओमान में बातचीत के समय ईरान में हाल के वर्षों की सबसे बड़ी जन-आंदोलन जैसी घटनाओं को सरकार ने बलपूर्वक दबाया है। अमेरिका ने ईरान के तटों के पास अपनी सैन्य मौजूदगी भी बढ़ाई है और राष्ट्रपति ट्रंप ने बल प्रयोग की चेतावनी दी है। विश्लेषकों के अनुसार अमेरिका की रणनीति साफ संकेत देती है कि वह कूटनीतिक बातचीत जारी रखते हुए आर्थिक और सैन्य दबाव के जरिए ईरान को झुकाने की कोशिश कर रहा है।