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असम CM का बयान मुस्लिम-विरोधी AIMPLB ने की SC और राष्ट्रपति से संज्ञान लेने की मांग

नई दिल्ली। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड AIMPLB ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा के हालिया बयान को मुस्लिम-विरोधी और असंवैधानिक करार दिया है। बोर्ड ने शुक्रवार को मांग की कि सर्वोच्च न्यायालय इस मामले का स्वतः संज्ञान ले। शर्मा ने अपने बयान में कहा था कि असम में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण के दौरान “मियां” समुदाय के लोग परेशान हैं और उन्हें मतदान करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इस दौरान उन्होंने बांग्लाभाषी मुसलमानों के लिए ‘मियां’ शब्द का इस्तेमाल किया।

AIMPLB ने किया गंभीर आरोप

बोर्ड के प्रवक्ता सैयद कासिम रसूल इलियास ने कहा कि मुख्यमंत्री का बयान मुस्लिम-विरोधी और अत्यंत विभाजनकारी है। उन्होंने चेताया कि नफरत भरी भाषा और उकसावे का प्रयोग अब राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनता जा रहा है। इलियास ने आरोप लगाया कि उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और असम के मुख्यमंत्री लगातार मुसलमानों को निशाना बनाकर भड़काऊ और असंवैधानिक बयान दे रहे हैं।

CJI और राष्ट्रपति से अपील

बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट से तुरंत स्वतः संज्ञान लेने की अपील की है। उनका कहना है कि एक मुख्यमंत्री के रूप में शर्मा ने संविधान की रक्षा की शपथ ली है, लेकिन उनके बयान खुले तौर पर किसी विशेष समुदाय के खिलाफ भेदभाव, उत्पीड़न और मताधिकार से वंचित करने का संकेत देते हैं। AIMPLB ने CJI और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी संवैधानिक कार्रवाई की मांग की है।

सेक्युलर दलों और नागरिकों से आग्रह

AIMPLB ने सभी सेक्युलर राजनीतिक पार्टियों, सिविल सोसाइटी समूहों और न्याय पसंद नागरिकों से संवैधानिक मूल्यों की रक्षा में एकजुट होने का आग्रह किया है।

मुख्यमंत्री का बयान

हिमंत शर्मा ने बुधवार को कहा कि असम में “बांग्लादेशी मियां” रहते हैं। भाजपा कार्यकर्ताओं ने मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण के दौरान ऐसे “विदेशियों” के खिलाफ पांच लाख से अधिक शिकायतें दर्ज कराई हैं। शर्मा ने शिवसागर जिले के डेमो में कहा कि “अज्ञात लोग” अब यहां से चले गए हैं और अपर असम के कुछ जिलों में ऐसे लोग रहते हैं, जहां पांच साल पहले कोई संदिग्ध नहीं था।

उन्होंने यह भी कहा कि बांग्लादेशी मियां असम में बस गए हैं। यदि इनमें से किसी को एसआर नोटिस नहीं मिलता, तो इसका मतलब है कि राज्य में कोई विदेशी नहीं है। भाजपा कार्यकर्ता ऐसे संदिग्ध लोगों के खिलाफ शिकायतें दर्ज कर रहे हैं, और सरकार या निर्वाचन आयोग इसकी जांच करेगा। शर्मा ने कहा कि यदि शिकायतें दर्ज नहीं की जातीं, तो लोग सवाल उठाएंगे कि विदेशियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

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