Balaghat News : बालाघाट। करीब 35 साल से लाल आतंक की चपेट में रहे बालाघाट जिले को अब बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जगी है। लगातार चल रहे संयुक्त एंटी-नक्सल ऑपरेशनों के जबरदस्त दबाव में माओवादी संगठन टूटता नजर आ रहा है। इसी कड़ी में एमएमसी जोन में सक्रिय खतरनाक नक्सली दंपत्ति धनुष उर्फ मुन्ना (25) और उसकी पत्नी रोनी उर्फ तुले (25) ने छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ जिले के बकरकट्टा थाने में आत्मसमर्पण कर दिया।
दोनों पर कुल 20 लाख रुपये का इनाम घोषित था — धनुष पर 14 लाख और तुले पर 6 लाख। इतनी कम उम्र में ही यह जोड़ा संगठन में बेहद अहम भूमिका निभा रहा था।
धनुष बना था नक्सलियों का ‘टेक्निकल हैंडलर’ (Balaghat News)
एंटी नक्सल ऑपरेशन के एडिशनल एसपी आदर्शकांत शुक्ला ने बताया कि धनुष फर्राटेदार अंग्रेजी बोलता था और कंप्यूटर चलाने में माहिर था। वह तेजी से टाइपिंग करता था और संगठन का पूरा प्रचार-प्रसार का काम देखता था।
– नक्सली साहित्य तैयार करना
– प्रेस नोट लिखना
– माओवादियों की मैगजीन ‘प्रभात’ के लिए कंटेंट बनाना
– सोशल मीडिया और डिजिटल प्रोपचार उसके जिम्मे था
इसी वजह से वह कई बड़े नक्सली नेताओं के सीधे संपर्क में था और उसे संगठन का ‘तकनीकी दिमाग’ माना जाता था।
पत्नी तुले भी थी खूंखार, सेंट्रल कमेटी सदस्य के साथ रहती थी (Balaghat News)
रोनी उर्फ तुले लंबे समय से सेंट्रल कमेटी के कुख्यात सदस्य रामदेर के साथ काम कर रही थी। कई नक्सली वारदातों और हमलों में उसका नाम सामने आ चुका है। वह माड़ डिवीजन और एमएमसी जोन में सक्रिय रही। लगातार सर्च ऑपरेशन, कैंप और सुरक्षाबलों की घेराबंदी से तंग आकर दोनों ने आखिरकार हथियार डाल दिए और मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया।
प्रशासन इसे नक्सल मोर्चे पर बड़ी सफलता मान रहा है। अधिकारियों का कहना है कि इस सरेंडर से नक्सली संगठन के प्रचार तंत्र को गहरा झटका लगा है। स्थानीय लोगों ने भी राहत की सांस ली है और उम्मीद जताई है कि जल्द ही बालाघाट से नक्सलवाद का पूरी तरह खात्मा हो जाएगा।