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रोहित शेट्टी के घर फायरिंग केस में बड़े खुलासे: लॉरेंस बिश्नोई गैंग की साजिश, स्कूटर से रेकी और ट्रेन से फरारी

नई दिल्‍ली । मुंबई के जुहू इलाके में फिल्म निर्देशक और निर्माता रोहित शेट्टी के घर के बाहर हुई फायरिंग की घटना ने न केवल फिल्म इंडस्ट्री, बल्कि सुरक्षा एजेंसियों को भी हिला कर रख दिया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच कर रही मुंबई क्राइम ब्रांच को अब तक कई चौंकाने वाले और अहम खुलासे हाथ लगे हैं। जांच में सामने आया है कि यह हमला अचानक नहीं, बल्कि पूरी योजना और तैयारी के साथ अंजाम दिया गया था, जिसके तार कुख्यात लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े हुए हैं।

पुलिस जांच के अनुसार, आरोपियों ने फायरिंग से पहले कई दिनों तक रोहित शेट्टी के जुहू स्थित घर और आसपास के इलाके की बारीकी से रेकी की थी। खास बात यह है कि रेकी के लिए जिस स्कूटर का इस्तेमाल किया गया, उसी स्कूटर का उपयोग फायरिंग के बाद मौके से फरार होने के लिए भी किया गया। इससे साफ है कि अपराधियों ने हर कदम पहले से सोच-समझकर उठाया था।

घटना वाले दिन एक अज्ञात शूटर ने रोहित शेट्टी के घर के बाहर पहुंचकर पांच राउंड फायरिंग की। फायरिंग के बाद वह बिना समय गंवाए स्कूटर पर सवार होकर फरार हो गया। पुलिस के मुताबिक, शूटर सीधे विले पार्ले रेलवे स्टेशन पहुंचा, जहां उसने स्कूटर छोड़ दिया और ट्रेन के जरिए मुंबई से बाहर निकल गया। इस तरह उसने अपने पीछे बहुत कम सुराग छोड़े, हालांकि तकनीकी जांच और आरोपियों की गिरफ्तारी से पूरी साजिश धीरे-धीरे सामने आ रही है।

क्राइम ब्रांच की जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि अपराध में इस्तेमाल किया गया स्कूटर पुणे से खरीदा गया था। स्कूटर 30 हजार रुपये में लिया गया था और यह मूल रूप से आनंद मारोटे के नाम पर रजिस्टर्ड था। रिकॉर्ड के अनुसार, मारोटे ने यह स्कूटर 6 अगस्त 2009 को खरीदा था। घटना से करीब 12 दिन पहले मारोटे ने यह स्कूटर गिरफ्तार आरोपी आदित्य गायकवाड़ को बेच दिया था। स्कूटर खरीदने के लिए पैसे कथित मास्टरमाइंड शुभम लोनकर ने उपलब्ध कराए थे।

पुलिस के मुताबिक, पूरी साजिश के तहत समर्थ पोमाजी के निर्देश पर सिद्धार्थ येनपुरे और स्वप्नील सकट स्कूटर को सड़क मार्ग से पुणे से लोनावला लाने वाले थे, ताकि इसे आगे शूटर को सौंपा जा सके। हालांकि किसी कारणवश शूटर लोनावला नहीं पहुंच सका। इसके बाद आरोपियों ने योजना में बदलाव करते हुए घटना से लगभग 10 दिन पहले स्कूटर को सीधे मुंबई पहुंचा दिया और अज्ञात शूटर के हवाले कर दिया। इस काम के बदले उन्हें अतिरिक्त पैसे भी दिए गए।जांच में यह बात भी सामने आई है कि मुंबई में स्कूटर पहुंचाने वाले आरोपियों को यह जानकारी थी कि वे किसी आपराधिक साजिश का हिस्सा हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं बताया गया था कि निशाना रोहित शेट्टी का घर होगा। इससे यह संकेत मिलता है कि मास्टरमाइंड ने जानबूझकर पूरी जानकारी सीमित लोगों तक ही रखी थी, ताकि पकड़े जाने की स्थिति में पूरी साजिश उजागर न हो सके।

क्राइम ब्रांच के अनुसार, इस मामले में समर्थ पोमाजी की भूमिका बेहद अहम रही है। उसने मुख्य शूटर की सक्रिय रूप से मदद की। शुभम लोनकर के निर्देश पर समर्थ ने आदित्य गायकवाड़ की मदद से स्कूटर का इंतजाम कराया और फायरिंग की पूरी योजना को जमीन पर उतारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जांच में यह भी सामने आया है कि समर्थ लगातार शुभम लोनकर के संपर्क में था और दोनों के बीच सिग्नल ऐप के जरिए नियमित बातचीत होती थी। इसी सुरक्षित मैसेजिंग ऐप के माध्यम से शुभम समर्थ को निर्देश देता था और पूरी योजना को नियंत्रित कर रहा था।

अब तक पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों आदित्य गायकवाड़, सिद्धार्थ येनपुरे, समर्थ पोमाजी और स्वप्नील सकट को गिरफ्तार कर लिया है। इनसे पूछताछ के आधार पर पुलिस को कई अहम जानकारियां मिली हैं। फिलहाल क्राइम ब्रांच इस पूरे मामले के कथित मास्टरमाइंड शुभम लोनकर की तलाश में जुटी हुई है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही उसे भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।रोहित शेट्टी के घर पर हुई इस फायरिंग की घटना ने एक बार फिर संगठित अपराध और फिल्मी हस्तियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस साजिश की परतें खुलती जा रही हैं, और आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है।

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