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फरीदाबाद जेल में राम मंदिर हमले के आरोपी का खून देश विरोध की साजिश का अंत या जेल सुरक्षा पर सवाल


नई दिल्ली :अयोध्या में बने राम मंदिर पर हमले की कथित साजिश से जुड़े मामले में फरीदाबाद जिला जेल से एक सनसनीखेज घटना सामने आई है। जेल में बंद उन्नीस वर्षीय आरोपी अब्दुल रहमान की रविवार रात हत्या कर दी गई। अब्दुल रहमान पर आरोप था कि वह राम मंदिर परिसर पर ग्रेनेड हमले की साजिश में शामिल था। इस घटना ने न केवल जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं बल्कि अंडरवर्ल्ड गैंग की खुलेआम चुनौती को भी उजागर किया है।

अब्दुल रहमान को मार्च दो हजार पच्चीस में हरियाणा एसटीएफ और गुजरात एटीएस की संयुक्त कार्रवाई में गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के समय उसके पास से दो हैंड ग्रेनेड बरामद किए गए थे। जांच एजेंसियों का दावा था कि वह आईएसआई से जुड़े नेटवर्क के संपर्क में था और अयोध्या स्थित राम मंदिर से संबंधित कई संवेदनशील वीडियो उसके मोबाइल से मिले थे। इसके बाद उसे फरीदाबाद जिला जेल में न्यायिक हिरासत में रखा गया था।

रविवार रात करीब आठ बजे जेल के भीतर अचानक हिंसा भड़क उठी। बताया जा रहा है कि उसी बैरक में बंद कैदी अरुण चौधरी ने किसी नुकीली वस्तु या पत्थर से अब्दुल रहमान के सिर पर हमला कर दिया। हमले के बाद जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया। गंभीर रूप से घायल अब्दुल रहमान को तुरंत अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

इस हत्या के बाद मामला और ज्यादा गंभीर तब हो गया जब कुख्यात रोहित गोदारा गैंग की ओर से सोशल मीडिया पर एक पोस्ट सामने आई। गैंग के सदस्य महेंद्र डेलाना ने इस हत्या की जिम्मेदारी को नैतिक समर्थन देते हुए अरुण चौधरी की खुलेआम सराहना की। पोस्ट में कहा गया कि जो भी देश के खिलाफ जाएगा उसका यही अंजाम होगा। इस बयान को सुरक्षा एजेंसियां खुलेआम धमकी और कानून व्यवस्था को चुनौती के रूप में देख रही हैं।

रोहित गोदारा गैंग का नाम पहले भी कई आपराधिक मामलों में सामने आ चुका है। जेल के भीतर इस तरह की वारदात और उसके बाद गैंग का खुला समर्थन यह संकेत देता है कि जेलों के अंदर अपराधी नेटवर्क किस हद तक सक्रिय हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि एक हाई प्रोफाइल आतंकी मामले के आरोपी की सुरक्षा में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई।

उधर अब्दुल रहमान के परिवार को जैसे ही जेल से सूचना मिली वे फरीदाबाद के लिए रवाना हो गए। पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया चल रही है। परिजनों का कहना है कि अब्दुल रहमान उनके परिवार का इकलौता वारिस था। दो दिन पहले ही वे उससे जेल में मिलकर लौटे थे और किसी को अंदेशा नहीं था कि इतनी बड़ी घटना हो जाएगी।

इस मामले की जांच अब कई स्तरों पर की जा रही है। एक ओर हत्या की आपराधिक जांच होगी वहीं दूसरी ओर जेल प्रशासन की भूमिका भी जांच के घेरे में है। यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या जेलें सुधार गृह हैं या अपराध का नया मैदान बनती जा रही हैं।

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