भोपाल। मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सभी निजी स्कूलों को अंतिम अल्टीमेटम जारी किया है। मध्य प्रदेश निजी विद्यालय फीस तथा संबंधित विषयों का विनियमन अधिनियम-2020 के तहत, अब सभी प्राइवेट स्कूलों को अपनी फीस संरचना किताबों की सूची और यूनिफॉर्म का विवरण 15 फरवरी 2026 तक आधिकारिक पोर्टल पर अपलोड करना होगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई स्कूल इस समय-सीमा का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ भारी जुर्माना और मान्यता रद्द करने जैसी कार्रवाई की जा सकती है।
शिक्षा विभाग के 5 बड़े नियम अभिभावकों के लिए राहत
फीस में पारदर्शितास्कूलों को अपनी ट्यूशन फीस के साथ-साथ अन्य सभी चार्जेस पोर्टल पर सार्वजनिक करने होंगे, ताकि अभिभावक पहले से तुलना कर सकें।किताबों की ‘कमीशनखोरी’ पर रोकस्कूल प्रबंधन अब अभिभावकों को किसी विशेष दुकान से किताबें या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। किताबों की सूची सार्वजनिक करनी होगी ताकि वे खुले बाजार से खरीदी जा सकें।यूनिफॉर्म में बदलाव पर पाबंदीविभाग के नियम के अनुसार, कोई भी निजी स्कूल 3 साल से पहले अपनी स्कूल यूनिफॉर्म नहीं बदल सकेगा। दुकानदारों पर भी नजरयदि किसी विशेष दुकान पर ही स्कूल की सामग्री मिलती है, तो उस दुकानदार का लाइसेंस भी निरस्त किया जा सकता है।फीस वृद्धि की सीमास्कूल बिना अनुमति के सालाना 10% से अधिक फीस नहीं बढ़ा सकते। इससे ज्यादा वृद्धि के लिए जिला समिति की अनुमति अनिवार्य है।
भोपाल के 150 स्कूलों पर लटकी तलवार
अकेले भोपाल जिले में करीब 150 निजी स्कूल ऐसे हैं जिन्होंने अब तक पोर्टल पर अपनी जानकारी अपडेट नहीं की है। जिला शिक्षा अधिकारी ने इन स्कूलों को नोटिस जारी कर चेतावनी दी है। शिक्षा विभाग का यह कदम पारदर्शिता लाने और शिक्षा के व्यवसायीकरण को रोकने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।