मेघालय का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह राज्य भारत का गौरव है। पर्वतमालाओं से घिरा, हरियाली और प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर मेघालय अपनी समृद्ध जनजातीय संस्कृति और परंपराओं के लिए जाना जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मेघालय की सांस्कृतिक विविधता और पर्यावरण के प्रति जागरूक जीवनशैली देश के अन्य हिस्सों के लिए प्रेरणास्रोत है।मणिपुर को लेकर उन्होंने कहा कि यह राज्य भारत के गहने के रूप में प्रसिद्ध है। मणिपुर की कला, नृत्य और सांस्कृतिक विरासत ने इसे अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है। मुख्यमंत्री ने बताया कि मणिपुर की पहचान उसकी अद्वितीय संस्कृति, खेल प्रतिभा और सामाजिक समरसता से जुड़ी हुई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य शांति, विकास और सांस्कृतिक संरक्षण के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ता रहेगा।
त्रिपुरा के संदर्भ में डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यह राज्य माँ त्रिपुरसुंदरी की कृपा से अभिसिंचित है और अपने नैसर्गिक सौंदर्य के लिए सुविख्यात है। उन्होंने त्रिपुरा की सांस्कृतिक परंपराओं ऐतिहासिक धरोहरों और जनजीवन की सरलता को सराहा। मुख्यमंत्री के अनुसार, त्रिपुरा ने सीमित संसाधनों के बावजूद विकास और सामाजिक संतुलन का उदाहरण प्रस्तुत किया है।मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था का भी उल्लेख किया और कहा कि बाबा महाकाल से यही मंगलकामना है कि प्रकृति की गोद में बसे ये तीनों राज्य निरंतर प्रगति करें। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र और राज्यों के समन्वय से पूर्वोत्तर भारत विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है और आने वाला समय इन राज्यों के लिए और अधिक अवसर लेकर आएगा।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में मुख्यमंत्री के इस संदेश को राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक सम्मान का प्रतीक माना जा रहा है। यह संदेश ऐसे समय में आया है, जब देश के अलग-अलग हिस्सों में क्षेत्रीय पहचान के साथ-साथ राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।स्थापना दिवस के अवसर पर मेघालय, मणिपुर और त्रिपुरा में सांस्कृतिक कार्यक्रमों, सरकारी आयोजनों और जनउत्सव की तैयारियां की गई हैं। इन आयोजनों के माध्यम से राज्यों की विकास यात्रा, सांस्कृतिक धरोहर और भविष्य की योजनाओं को जनता के सामने रखा जा रहा है।