सम्मेलन की थीम एकीकृत कुशल और जन केंद्रित न्यायपालिका रखी गई है। इस विषय के अंतर्गत न्यायिक व्यवस्था से जुड़ी मौजूदा चुनौतियों न्यायिक प्रक्रिया में सुधार तकनीक के उपयोग और आम नागरिकों तक न्याय की पहुंच को सरल बनाने जैसे मुद्दों पर विस्तार से मंथन किया जाएगा। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य विभिन्न उच्च न्यायालयों के अनुभव साझा कर न्याय प्रणाली को मजबूत करने के लिए साझा और समन्वित रणनीति विकसित करना है।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया बनने के बाद न्यायमूर्ति सूर्यकांत का यह मध्यप्रदेश का पहला आधिकारिक दौरा है। सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में CJI न्यायपालिका की भूमिका संस्थागत समन्वय और समयबद्ध न्याय वितरण प्रणाली पर अपना संबोधन देंगे। उनके विचारों को वर्तमान न्यायिक परिदृश्य के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सम्मेलन में भाग ले रहे विभिन्न हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस अपने अपने राज्यों में न्यायिक प्रशासन से जुड़े अनुभव सुधारात्मक प्रयास और व्यावहारिक चुनौतियों को साझा करेंगे। विशेष रूप से लंबित मामलों को कम करने वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र ई कोर्ट्स न्यायिक प्रशिक्षण और डिजिटल इनोवेशन जैसे विषय चर्चा के केंद्र में रहेंगे। आयोजकों का मानना है कि यह संवाद न्यायपालिका के भीतर सहयोग और समन्वय को नई दिशा देगा।
CJI के भोपाल आगमन को देखते हुए सुरक्षा और प्रशासनिक स्तर पर व्यापक तैयारियां की गई हैं। वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी एयरपोर्ट से लेकर नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी तक व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे हैं। सम्मेलन के दौरान CJI की वरिष्ठ अधिवक्ताओं और न्यायिक अधिकारियों से औपचारिक मुलाकात की भी संभावना है।
नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी में आयोजित यह सम्मेलन केवल न्यायपालिका के आंतरिक सुधारों तक सीमित नहीं है बल्कि इसका व्यापक प्रभाव आम नागरिकों तक न्याय को सरल पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने पर भी पड़ेगा। सम्मेलन के दूसरे दिन विभिन्न सत्रों के निष्कर्षों और सुझावों के आधार पर भविष्य की कार्ययोजना तय किए जाने की संभावना है।