कार्यशाला का उद्देश्य औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों को नए संबद्धता मानदंडों की स्पष्ट, व्यवहारिक और प्रक्रियात्मक जानकारी प्रदान करना था। राज्यमंत्री श्री टेटवाल ने कहा कि औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित किए बिना रोजगारोन्मुख कौशल विकास संभव नहीं है। नए मानदंड संस्थानों को अधिक सक्षम, उत्तरदायी और उद्योग के अनुकूल बनाएंगे।
उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए इन नए मानदंडों से प्रशिक्षण प्रणाली में एकरूपता आएगी और संचालन में स्पष्टता सुनिश्चित होगी। इससे न केवल प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि उद्योगों को उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप कुशल मानव संसाधन भी उपलब्ध होगा। श्री टेटवाल ने राज्य संचालनालयों, शासकीय और निजी आईटीआई प्रबंधन तथा उद्योग प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे इन मानदंडों को सकारात्मक दृष्टिकोण से अपनाएं और उनके प्रभावी क्रियान्वयन में सक्रिय भूमिका निभाएं।
कार्यशाला में यह तथ्य सामने आया कि संशोधित मानदंडों के माध्यम से आईटीआई संस्थानों की संबद्धता प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल, पारदर्शी और समयबद्ध होगी। नए आईटीआई की स्थापना, ट्रेड एवं यूनिट की स्वीकृति, नवीनीकरण, निरीक्षण और मूल्यांकन प्रणाली को सरल एवं स्पष्ट बनाया गया है, जिससे संस्थानों को अनावश्यक प्रक्रियागत जटिलताओं से राहत मिलेगी।
कार्यशाला में प्रशिक्षण संस्थानों, उद्योग जगत और शासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी चर्चा हुई। आईटीआई संबद्धता मानदंड–2025 इस समन्वय को मजबूत करने और कौशल प्रशिक्षण को वास्तविक रोजगार से जोड़ने का प्रभावी माध्यम साबित होंगे।
इस अवसर पर केन्द्रीय कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय (डीजीटी) नई दिल्ली, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के अधिकारी, शासकीय एवं निजी आईटीआई, इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक संस्थानों के प्रतिनिधि तथा उद्योग जगत से जुड़े हितधारक शामिल थे। महानिदेशालय प्रशिक्षण DGT नई दिल्ली के प्रतिनिधियों ने संबद्धता मानदंडों पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया, जिसमें प्रक्रियाओं और प्रावधानों की चरणबद्ध जानकारी साझा की गई।