हादसे के दिन, लाइनमैन ने मजाक-मजाक में बंदूक के काम करने का तरीका देखना चाहा। इसी दौरान बंदूक से अचानक गोली निकल गई और रामबाबू परमार के दाहिने हाथ की कोहनी में जाकर लगी। गोली लगते ही वह बुरी तरह से घायल हो गया। तुरंत मौके पर मौजूद कर्मचारियों ने उसे पचोर अस्पताल पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उसे इंदौर रेफर कर दिया गया।
पुलिस ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि यह हादसा किसी आपसी विवाद या बदइच्छा से नहीं, बल्कि जिज्ञासा और सुरक्षा नियमों की अनदेखी के कारण हुआ। घटना ने यह साफ कर दिया कि लाइसेंसी बंदूक भी सही सुरक्षा उपाय और प्रशिक्षण के बिना कितना खतरनाक साबित हो सकती है।
स्थानीय अधिकारियों ने इस घटना को गंभीरता से लिया है और कंपनी प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि भविष्य में ऐसे हादसों से बचने के लिए सभी कर्मचारियों को हथियारों के सही उपयोग और सुरक्षा नियमों का प्रशिक्षण अनिवार्य रूप से दिया जाए। इसके साथ ही कार्यालय में बंदूकों को सुरक्षित स्थान पर रखने और अनुचित प्रयोग पर रोक लगाने की भी चेतावनी दी गई है।
हादसे के बाद रामबाबू परमार की हालत स्थिर बताई जा रही है, लेकिन डॉक्टरों ने कहा कि उसे लंबी अवधि तक फिजियोथेरेपी और देखभाल की आवश्यकता हो सकती है। यह घटना न सिर्फ पचोर बल्कि पूरे राजगढ़ जिले के लिए चेतावनी बनकर आई है कि हथियारों के प्रति लापरवाही कभी-कभी जानलेवा साबित हो सकती है।
इस घटना ने स्थानीय लोगों और कर्मचारियों को यह याद दिलाया कि सुरक्षा नियमों का पालन करना किसी भी परिस्थिति में अनिवार्य है, चाहे मामला मजाक का ही क्यों न हो। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि हादसे की पूरी जांच की जाएगी और जिम्मेदार पक्षों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो।
इस पूरे मामले ने सुरक्षा नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और हथियारों के सुरक्षित उपयोग की आवश्यकता को फिर से सबके सामने रखा है।