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मप्र को मिला केंद्र से पंचायती राज के लिए 652 करोड़ का बूस्टर: ग्रामीण विकास को मिलेगी नई गति!

भोपाल। मध्य प्रदेश की पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए पंद्रहवें वित्त आयोग के अनुदान के रूप में 652.55 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। यह राशि वित्त वर्ष 2024-25 की बंधनरहित अनुदान की दूसरी किस्त के रूप में है, जो राज्य की सभी 52 पात्र जिला पंचायतों, 312 पात्र ब्लॉक पंचायतों और 23,001 पात्र ग्राम पंचायतों को लाभ पहुंचाएगी। साथ ही, पिछली किस्त के रोके गए 77 लाख रुपये भी तीन अतिरिक्त ब्लॉक पंचायतों और छह ग्राम पंचायतों को मुहैया कराए गए हैं।


इस संबंध में प्राप्‍त जानकारी के अनुसार उक्‍त अनुदान ग्रामीण स्थानीय निकायों (आरएलबी) को मजबूत करने का माध्यम बनेगा, जो स्वच्छता, जल आपूर्ति, सड़क निर्माण और बुनियादी ढांचे के विकास में सहायक होगा। मध्य प्रदेश जैसे कृषि-प्रधान राज्य में यह कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने वाला साबित होगा।

उल्‍लेखनीय है कि मध्य प्रदेश में पंचायती राज संस्थाएं (पीआरआई) लोकतंत्र की जड़ें मजबूत करने का आधार हैं। राज्य में कुल 52 जिला पंचायतें, 312 ब्लॉक पंचायतें और 23,001 ग्राम पंचायतें कार्यरत हैं, जो लगभग 7.8 करोड़ की जनसंख्या को कवर करती हैं। 73वें संविधान संशोधन के बाद यह त्रिस्तरीय व्यवस्था स्थापित हुई, जो ग्रामीण विकास को स्थानीय स्तर पर सुनिश्चित करती है। पंद्रहवें वित्त आयोग ने 2021-26 की अवधि के लिए कुल 2.36 लाख करोड़ रुपये का अनुदान निर्धारित किया था, जिसमें मध्य प्रदेश को 6,339 करोड़ रुपये का हिस्सा मिलना है। इस अनुदान का बड़ा हिस्सा बंधनरहित है, जिसका उपयोग पंचायतें अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार कर सकती हैं।

आर्थिक आंकड़ों से झलकता विकास का चित्र

पिछले वर्षों के आंकड़े इस अनुदान की अहमियत को रेखांकित करते हैं। वित्त वर्ष 2023-24 में मध्य प्रदेश को पंद्रहवें वित्त आयोग से 1,200 करोड़ रुपये से अधिक मिले थे, जिनका उपयोग जल जीवन मिशन, स्वच्छ भारत मिशन और ग्रामीण सड़कों पर हुआ। राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार, 2024 तक ग्राम पंचायतों ने 15,000 किलोमीटर से अधिक ग्रामीण सड़कें बनाईं, जबकि स्वच्छता अभियान में 90 फीसद से ऊपर खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) गांव हासिल हो चुके हैं। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसएसओ) के अनुसार, मध्य प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति आय 2023 में 1.2 लाख रुपये तक पहुंची, जो अनुदान से प्रेरित है।

इस अनुदान से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा। मध्य प्रदेश का ग्रामीण जीडीपी राज्य के कुल जीडीपी (2024-25 अनुमान: 4.5 लाख करोड़ रुपये) का 55% है। अनुदान से जल संरक्षण परियोजनाओं में निवेश बढ़ेगा, खासकर बुंदेलखंड और महाकौशल क्षेत्रों में जहां सूखा प्रभावित किसान हैं। उदाहरणस्वरूप, 2024 में राज्य ने 5,000 से अधिक तालाबों का जीर्णोद्धार किया, जिससे सिंचाई क्षमता 20 फीसद बढ़ी। इसके अलावा, महिला सशक्तिकरण के लिए पंचायतों में 50 प्रतिशत आरक्षण ने 1.5 लाख से अधिक महिला प्रतिनिधियों को सक्रिय किया है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव सरकार ने 2025 बजट में पंचायतों के लिए 10,000 करोड़ का अतिरिक्त प्रावधान किया, जो केंद्र अनुदान के साथ मिलकर ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर को दोगुना करेगा। विशेष रूप से, आदिवासी बहुल जिलों जैसे मंडला, डिंडोरी में यह राशि स्वास्थ्य केंद्रों और स्कूलों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी। नीति आयोग के आंकड़ों से स्पष्ट है कि पंद्रहवें वित्त आयोग अनुदान से राज्य की ग्रामीण गरीबी दर 2024 में 25 फीसद से घटकर 22 फीसद रह गई है।

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