MP E-Attendance : जबलपुर। मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के लिए अनिवार्य ई-अटेंडेंस को लेकर हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ में तीखी बहस हुई। सोमवार को जस्टिस मनिंदर सिंह भट्टी की एकलपीठ के सामने प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आए 27 शिक्षकों की याचिका पर सुनवाई हुई। शिक्षकों ने कोर्ट में शपथ-पत्र दाखिल कर बताया कि “हमारे शिक्षक” ऐप से रोज सुबह अटेंडेंस मार्क करने में नेटवर्क की भारी दिक्कत आती है, कई बार तो पूरी कोशिश के बावजूद उपस्थिति दर्ज ही नहीं हो पाती।
डेटा चोरी का खतरा बढ़ गया है (MP E-Attendance)
याचिकाकर्ताओं के वकील अंशुमान सिंह ने कोर्ट को बताया कि जून 2025 से विभाग ने सभी शिक्षकों को अपने निजी मोबाइल पर यह ऐप डाउनलोड करने और दिन भर जीपीएस-लोकेशन चालू रखने का आदेश दिया है। इससे न सिर्फ डेटा चोरी का खतरा बढ़ गया है, बल्कि लगातार साइबर फ्रॉड के मामले देखते हुए शिक्षकों मुख्यतः महिलाओं को अपनी निजी सुरक्षा की भी चिंता सता रही है। कोर्ट ने पिछली सुनवाई में शिक्षकों से कहा था कि वे हलफनामा देकर बताएं कि किन-किन तारीखों को उन्होंने अटेंडेंस लगाने की कोशिश की और तकनीकी वजह से सफल नहीं हो पाए। शिक्षकों ने सोमवार को यही शपथ-पत्र पेश किए।
मामले की अगली सुनवाई अब 24 नवंबर को (MP E-Attendance)
दूसरी तरफ शासन की ओर से दलील दी गई कि नेटवर्क की कोई समस्या नहीं है क्योंकि उसी स्कूल में बाकी शिक्षक सफलतापूर्वक अटेंडेंस लगा रहे हैं। कोर्ट ने शिक्षकों के शपथ-पत्र रिकॉर्ड पर लिए और सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई अब 24 नवंबर को होगी।
जबलपुर के मुकेश सिंह वरकड़े, सतना के सत्येंद्र तिवारी सहित 27 शिक्षकों ने इस याचिका में ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता को ही चुनौती दी है। उनका कहना है कि निजी फोन पर सरकारी ऐप और चौबीसों घंटे लोकेशन चालू रखना निजता के अधिकार का भी उल्लंघन है। अब सभी की निगाहें 24 नवंबर की सुनवाई पर टिकी हैं।