MP News : मध्यप्रदेश सरकार के राजस्व का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत, इंदौर के बाद, सिंगरौली जिला आज भी मूलभूत सुविधाओं की आस लगाए तरस रहा है। सरकारी दावों के बीच दो दिल दहला देने वाली घटनाएँ सामने आई हैं, जो विकास के झूठे वादों को नंगा कर देती हैं। यहाँ न तो मरीजों को समय पर चिकित्सा सुविधा मिल पा रही है और न ही मृतकों को उचित सम्मान के साथ अंतिम विदाई। गरीब और दूरस्थ ग्रामीण परिवार सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं, जहाँ बुनियादी ढाँचे की कमी जानलेवा साबित हो रही है।
आपात स्थिति में ऐसे ही अस्थायी इंतजाम करना पड़ जाते हैं (MP News) :
जिले के सरई थाना इलाके के इटावा गाँव में हाल ही में एक हत्या की वारदात के बाद मृतक पप्पू साकेत के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए ले जाना पड़ा तो उपलब्ध न होने पर नगर परिषद ने कचरा संग्रहण की पुरानी ट्रॉली गाड़ी भेज दी। वह वाहन, जो रोजाना कूड़ा-करकट उठाने का काम करता है, उसी में परिवार वालों ने शव लादा और मोर्चरी पहुँचे। जाँच के बाद उसी गाड़ी से शव को वापस घर लाया गया। नगर परिषद सरई के मुख्य चिकित्सा अधिकारी सुरेंद्र ने सफाई देते हुए कहा कि उनके पास कोई शव वाहन नहीं है, इसलिए आपात स्थिति में ऐसे ही अस्थायी इंतजाम करना पड़ जाते हैं।
एंबुलेंस को दो घंटे लग गए पहुँचने में (MP News)
दूसरी तरफ, देवसर ब्लॉक के चुरवाही गाँव की दर्द भरी कहानी और भी मार्मिक है। यहाँ सड़क न होने के कारण 80 वर्षीय बुजुर्ग महिला को परिजनों ने खाट पर लादकर अस्पताल पहुँचाया। परिवार के सदस्यों के मुताबिक, एंबुलेंस को दो घंटे लग गए पहुँचने में, और घर से मुख्य मार्ग तक पहुँचने के लिए लगभग एक किलोमीटर की संकरी पगडंडी पर महिला को कंधों पर उठाकर ले जाना पड़ा। वाहन का कोई नामोनिशान नहीं था, सिर्फ एक तंग रास्ता जो पैदल ही पार किया जा सकता था। स्थानीय निवासियों का कहना है कि ऐसी कठिनाई यहाँ रोजमर्रा की बात है, और कई गाँव आज भी सड़क संपर्क तथा स्वास्थ्य सेवाओं से कटे हुए हैं।
क्षेत्रीय विधायक राजेंद्र मेश्राम दावा करते हैं कि कभी नर्क जैसा माना जाने वाला यह इलाका अब विकास के कारण स्वर्ग बन चुका है। वहीं, प्रशासनिक महकमे का तर्क है कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 250 से अधिक आबादी वाले गाँवों में निर्माण कार्य मंजूर हो रहे हैं। लेकिन इन आश्वासनों के बीच सिंगरौली की ये कड़वी हकीकतें उजागर करती हैं कि जमीनी स्तर पर बदलाव नाममात्र का है। विकास का यह चेहरा कागजी कारनामों तक सीमित नजर आता है, जबकि आम जनता की पीड़ा बढ़ती ही जा रही है। जिला प्रशासन को अब तुरंत कदम उठाने होंगे, वरना ऐसी घटनाएँ और बढ़ेंगी।