साध्वी के पिता वीरमनाथ ने मौत को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि प्रेम बाईसा को सिर्फ मामूली जुकाम था और इलाज के नाम पर आश्रम में गलत इंजेक्शन लगाया गया, जिसके बाद उनकी हालत बिगड़ गई। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
पुराना वीडियो विवाद फिर चर्चा में
साध्वी की मौत के बाद एक कथित सुसाइड नोट सामने आया है, जिसमें उन्होंने उसी पुराने विवाद का जिक्र किया है, जिसने उनकी जिंदगी को झकझोर कर रख दिया था। दरअसल, 13 जुलाई 2025 को सोशल मीडिया पर साध्वी का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वह एक व्यक्ति के गले लगती नजर आई थीं। वीडियो को अश्लील बताकर फैलाया गया था।
इस मामले में साध्वी ने 16 जुलाई को बोरानाडा थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। उन्होंने साफ कहा था कि वीडियो में दिखने वाला व्यक्ति कोई और नहीं, बल्कि उनके पिता वीरमनाथ हैं और वह वीडियो वर्ष 2021 का है, जब वह मानसिक अवसाद में थीं और पिता उन्हें सांत्वना दे रहे थे।
ब्लैकमेलिंग केस और गिरफ्तारियां
पुलिस जांच में सामने आया कि यह वीडियो घर में लगे सीसीटीवी कैमरे से निकाला गया था। आरोप है कि साउंड सिस्टम लगाने वाले जोगेंद्र उर्फ जोगाराम, उसके साथियों और पत्नी ने वीडियो को एडिट कर वायरल करने की धमकी दी और 20 लाख रुपये की मांग की। पैसे न मिलने पर वीडियो सोशल मीडिया पर डाल दिया गया। इस मामले में पुलिस ने 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
तत्कालीन पुलिस अधिकारियों ने कहा था कि आरोपियों ने बाप-बेटी के रिश्ते को गलत तरीके से पेश कर साध्वी की छवि धूमिल करने की कोशिश की। उस समय साध्वी ने कहा था, “इन लोगों ने भगवे पर कलंक लगाया है, मैं अपनी सच्चाई साबित करने के लिए अग्निपरीक्षा देने को तैयार हूं।”
सुसाइड नोट और नए सवाल
मौत के बाद सामने आए कथित सुसाइड नोट में साध्वी ने लिखा कि उन्होंने आदि शंकराचार्य और कई संतों को पत्र लिखकर अग्नि परीक्षा की अनुमति मांगी, लेकिन नियति को कुछ और मंजूर था। इस नोट ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है।
पिता और आश्रम की भूमिका पर सवाल
मौत के बाद कई भक्तों ने साध्वी के पिता और आश्रम की भूमिका पर सवाल उठाए। आरोप लगे कि शुरुआत में पोस्टमार्टम से बचने की कोशिश की गई, हालांकि पुलिस की समझाइश के बाद पोस्टमार्टम कराया गया।
फिलहाल, साध्वी प्रेम बाईसा की मौत को लेकर कई सवाल अब भी अनुत्तरित हैं। पुलिस मामले की हर एंगल से जांच कर रही है और सुसाइड नोट, इलाज प्रक्रिया और आश्रम की भूमिका की गहन पड़ताल की जा रही है।