धमाके से थर्रा उठा इलाका प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह रूह कंपा देने वाला हादसा बीती रात सारनी के व्यस्तम ‘जय स्तंभ चौक’ के पास घटित हुआ। मृतक सुनील कुमार लोखंडे अपनी तीन पहिया बैटरी चलित साइकिल से गुजर रहे थे, तभी अचानक साइकिल की बैटरी में किसी शक्तिशाली बम की तरह जोरदार विस्फोट हुआ। धमाका इतना तीव्र था कि आसपास के लोग सहम गए। विस्फोट के साथ ही साइकिल ने आग का गोला रूप ले लिया। सुनील को संभलने या वाहन से उतरने का मौका तक नहीं मिला और वे आग की लपटों के बीच बुरी तरह झुलस गए, जिससे उनकी मौके पर ही तड़प-तड़प कर मौत हो गई।
मेहनतकश शिक्षक की दुखद विदाई मृतक सुनील कुमार लोखंडे की पहचान एक जुझारू व्यक्तित्व के रूप में होती थी। शारीरिक अक्षमता के बावजूद वे समाज पर बोझ नहीं थे; वे लोगों को शिक्षित करने का कार्य करते थे और कड़ी मेहनत कर अपना जीवनयापन कर रहे थे। जिस साइकिल ने उनकी जान ली, वह संभवतः नगर पालिका द्वारा दिव्यांग सहायता योजना के अंतर्गत प्रदान की गई थी। एक शिक्षित और कर्मठ व्यक्ति का इस तरह तकनीक की खामी की भेंट चढ़ जाना बेहद दुखद है।
सवालों के घेरे में प्रशासन और गुणवत्ता इस हादसे ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या दिव्यांगों को वितरित किए जाने वाले इन उपकरणों की गुणवत्ता की जांच की जाती है? क्या इन बैटरियों के सुरक्षा मानकों (Safety Standards) का नियमित ऑडिट होता है? यदि यह साइकिल नगर पालिका द्वारा दी गई थी, तो क्या इसके रखरखाव के निर्देश दिए गए थे? स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि घटिया क्वालिटी के उपकरणों की आपूर्ति के कारण एक मासूम जान चली गई।
पुलिस ने फिलहाल मर्ग कायम कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की तकनीकी जांच शुरू कर दी है। क्षेत्रवासी अब इस मामले में उच्च स्तरीय जांच और पीड़ित परिवार के लिए न्याय व मुआवजे की मांग कर रहे हैं।