कल्पा
तीर्थन घाटी
गोकर्ण
गोवा की भीड़ से दूर, फरवरी में कर्नाटक का गोकर्ण खासतौर पर ओम बीच के आगे का इलाका एक अलग ही अनुभव देता है. यहां समुद्र देखने से ज़्यादा सुनने जैसा लगता है. न ज्यादा नमी परेशान करती है और न पर्यटकों की भीड़. बस लहरों की आवाज़ और नमकीन हवा का हल्का सा स्पर्श मन को हल्का कर देता है.
मंडावा
राजस्थान का मंडावा फरवरी में अपने शांत रूप में दिखाई देता है. शेखावाटी की हवेलियां, खाली गलियां और धीमी दोपहरें किसी पुराने दौर में ले जाती हैं. यहां सुकून प्रकृति से नहीं बल्कि समय की धीमी रफ्तार से मिलता है, जैसे दिन खुद कह रहा हो कि जल्दी की कोई ज़रूरत नहीं है.
माजुली
असम का माजुली फरवरी में बेहद संतुलित लगता है. ब्रह्मपुत्र शांत रहती है और सत्रों में बिना किसी दिखावे के गतिविधियां चलती रहती हैं. यहां बैठकर चुप रहना भी एक तरह की आध्यात्मिकता जैसा महसूस होता है, जो पहाड़ या मंदिर से अलग लेकिन उतनी ही गहरी होती है.
इन जगहों में क्या समानता है
आध्यात्मिक यात्रिक और पिलग्रिम महादेवा ट्रैवल के चीफ जुग्ग्नु के अनुसार इन सभी जगहों में फरवरी में कुछ भी खास नहीं होता और शायद यही उन्हें खास बनाता है. न मौसम चरम पर होता है, न पर्यटक. न कुछ मिस करने का डर और न कुछ साबित करने की ज़रूरत. यही सुकून की असली परिभाषा है.