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मणिपुर में राष्ट्रपति शासन के अंत की तैयारी: भाजपा का नया फॉर्मूला मैतेई CM और कुकी डिप्टी CM; तरुण चुग बने पर्यवेक्षक


नई दिल्ली। मणिपुर में लगभग एक साल से जारी राष्ट्रपति शासन अब खत्म होने की कगार पर है। फरवरी 2025 से केंद्र के अधीन चल रहे इस राज्य में भाजपा एक बार फिर नई सरकार बनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। दिल्ली में भाजपा के शीर्ष नेतृत्व और मणिपुर के 20 से ज्यादा विधायकों के बीच हुई मैराथन बैठकों के बाद, सोमवार को पार्टी ने राष्ट्रीय महासचिव तरूण चुग को पर्यवेक्षक नियुक्त कर दिया है। अब जल्द ही एनडीए विधायक दल की बैठक होगी, जिसमें नए मुख्यमंत्री के नाम पर मुहर लगेगी।

शांति के लिए पावर शेयरिंग का नया मॉडल बीते सालों में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच हुई भीषण हिंसा और तनाव को कम करने के लिए भाजपा ने एक बड़ा दांव खेला है। सूत्रों के अनुसार, नई सरकार में मुख्यमंत्री मैतेई समुदाय से होगा, जबकि राज्य की एकता का संदेश देने के लिए कुकी समुदाय के किसी वरिष्ठ नेता को डिप्टी सीएम की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। यह कदम समुदायों के बीच की खाई को पाटने और प्रशासनिक संतुलन बनाने की कोशिश माना जा रहा है।

CM की रेस में ये नाम सबसे आगे निवर्तमान मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफा देने के बाद अब नेतृत्व परिवर्तन तय माना जा रहा है। मुख्यमंत्री पद की दौड़ में तीन प्रमुख नाम चर्चा में हैं सत्यब्रत सिंह: विधानसभा के पूर्व स्पीकर। टीएच बिस्वजीत सिंह: पूर्व कद्दावर मंत्री। के. गोविंद दास: वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री। ये तीनों ही चेहरे मैतेई समुदाय से आते हैं और पार्टी के भीतर अच्छी पकड़ रखते हैं।

विधायकों की मांग: चुनाव से पहले मिले काम का मौका मणिपुर विधानसभा का कार्यकाल 2027 तक है। ऐसे में भाजपा के 37 विधायकों सहित एनडीए के सहयोगी चाहते हैं कि चुनाव में जाने से पहले कम से कम एक साल का समय उन्हें मिले ताकि वे जनता के बीच विकास कार्यों के साथ जा सकें। हालांकि, कुकी विधायकों का एक धड़ा अब भी मणिपुर को विधानसभा के साथ केंद्र शासित प्रदेश (UT) बनाने की मांग पर अड़ा है, जिसे लेकर केंद्रीय नेतृत्व विचार कर रहा है।

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