सत्र के दौरान एक महिला पुलिसकर्मी ने रानी से पूछा कि क्या वह चाहती हैं कि उनकी बेटी अदीरा बड़ी होकर अभिनेत्री बने और फिल्मों में कदम रखें। इस सवाल के जवाब में रानी ने सहज और स्पष्ट अंदाज में कहा कि फिलहाल उनकी बेटी ताइक्वांडो सीख रही हैं। उन्होंने बताया कि उनका प्राथमिक उद्देश्य यह है कि अदीरा शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत और आत्मविश्वासी बने।रानी ने कहा कि ताइक्वांडो सीखने से बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ता है और अदीरा खुद को पहले से अधिक सशक्त महसूस कर रही हैं। उन्होंने आगे कहा कि भविष्य में अदीरा जो भी रास्ता चुनेंगी-चाहे वह फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ा हो या किसी अन्य क्षेत्र से-वह हमेशा उनका समर्थन करेंगी। रानी ने स्पष्ट किया कि उनकी प्राथमिकता अपनी बेटी की खुशी और सशक्तता हैन कि केवल पेशेवर सफलता।
आईएएनएस से बातचीत में रानी ने जीवन में खुश रहने की अहमियत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि खुश रहने वाला इंसान अपने आसपास के लोगों को भी खुश रख सकता है। रानी ने यह भी कहा कि एक मांबेटी और बहन होने के नाते उन्हें यह अनुभव हुआ है कि जीवन में आत्मविश्वास और संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है। इसी दृष्टिकोण को वे अपनी बेटी अदीरा को भी सिखा रही हैं।
रानी ने इस अवसर पर यह भी कहा कि आज के समय में लड़कियों का मजबूतआत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी होना बेहद जरूरी है। समाज में बदलाव तभी संभव हैजब महिलाएं खुद पर भरोसा करना सीखें। उन्होंने बताया कि अपने माता-पिता और परिवार की भूमिका के महत्व के साथ-साथलड़कियों को यह भी सिखाना आवश्यक है कि अपनी खुशीआत्मसम्मान और आत्मविश्वास से कभी समझौता न करें।रानी मुखर्जी का मानना है कि माता-पिता का समर्थन बच्चों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता हैलेकिन बच्चों की खुशी और उनके व्यक्तिगत विकास को प्राथमिकता देना ही सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अदीरा अभी अपनी पढ़ाई और ताइक्वांडो पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं और फिल्मों में आने का निर्णय भविष्य में उनकी खुद की इच्छा और रुचि पर निर्भर करेगा।
सार मेंरानी मुखर्जी की यह टिप्पणी न केवल एक मां के नजरिए को दर्शाती है बल्कि यह भी बताती है कि आज की युवा पीढ़ी में आत्मविश्वास और मानसिक मजबूती कितना जरूरी है। उन्होंने अपनी बेटी के लिए यही संदेश दिया कि जीवन में किसी भी क्षेत्र में कदम रखेंलेकिन हमेशा खुश रहें और अपने आत्मसम्मान का सम्मान करें।