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निमोनिया का खतरा बढ़ा, खासकर बच्चों और बुजुर्गों में जानिए बचाव के उपाय



नई दिल्ली। सर्दियों के शुरू होते ही निमोनिया का खतरा बढ़ जाता है, खासकर बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में। हर साल लाखों लोग निमोनिया से प्रभावित होते हैं और समय पर इलाज न मिलने पर यह जानलेवा भी साबित हो सकता है। इसी गंभीर बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल 12 नवंबर को विश्व निमोनिया दिवस मनाया जाता है। डॉ. सूर्यकान्त (विभागाध्यक्ष, रेस्पिरेटरी मेडिसिन, केजीएमयू, लखनऊ) के अनुसार, निमोनिया की पहचान, बचाव और समय पर उपचार बहुत जरूरी है क्योंकि पांच साल से कम उम्र के बच्चों में यह मृत्यु का प्रमुख कारण बन सकता है 
निमोनिया में एक या दोनों फेफड़ों के हिस्सों में सूजन आ जाती है और उनमें पानी भरने लगता है। यह अधिकतर संक्रमण के कारण होता है, लेकिन केमिकल, एस्पिरेशन (गले/खाने की नली से फेफड़ों में सामग्री चला जाना) और अन्य कारणों से भी हो सकता है। इसके मुख्य कारण बैक्टीरिया, वायरस, फंगस और परजीवी रोगाणु हैं, जबकि टीबी भी निमोनिया का एक बड़ा कारण बन सकता है। समय पर सही इलाज न मिलने पर निमोनिया जानलेवा साबित हो सकता है और भारत में संक्रामक रोगों से होने वाली मौतों में लगभग 20% मौतें निमोनिया की वजह से होती हैं।

निमोनिया किसी को भी हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों में जोखिम अधिक रहता है, जैसे धूम्रपान, शराब, नशे की आदत वाले, डायलिसिस कराने वाले मरीज, हृदय/फेफड़े/लिवर की बीमारी वाले, मधुमेह, गंभीर गुर्दा रोग, बुजुर्ग, नवजात, कैंसर या एड्स के मरीज। इसके प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार, खांसी, बलगम, सीने में दर्द, सांस फूलना और कुछ मरीजों में दस्त, उल्टी, चक्कर, मतिभ्रम, भूख न लगना और जोड़ों व मांसपेशियों में दर्द शामिल हैं।

डॉक्टर अक्सर खून की जांच, बलगम की जांच और छाती का एक्स-रे कराकर निमोनिया की पुष्टि करते हैं।

निमोनिया तीन मुख्य रास्तों से फैलता है: खांसने या छींकने से श्वास मार्ग, अस्पताल में लंबे समय तक भर्ती मरीजों में IV लाइन या पेसमेकर के माध्यम से खून के रास्ते, और एस्पिरेशन के जरिए जब मुंह या गले की सामग्री फेफड़ों में चली जाती है। इसलिए संक्रमण से बचाव के लिए स्वच्छता, मास्क, और सही उपचार जरूरी है।

निमोनिया से बचाव संभव है।

ठंड से बचें, खासकर बच्चों और बुजुर्गों को गर्म कपड़े पहनाएं और बाहर कम समय बिताएं। शुगर और अन्य बीमारियों का नियंत्रण रखें और नियमित जांच करवाते रहें। 65 वर्ष से ऊपर या बीमार लोगों को न्यूमोकोकल और फ्लू वैक्सीन जरूर लगवानी चाहिए, क्योंकि ये टीके फेफड़ों के संक्रमण से बचाने में मदद करते हैं। अस्पताल में संक्रमण से बचने के लिए हाथों को सही तरीके से धोना, नेबुलाइजर और ऑक्सीजन उपकरणों का उचित स्टरलाइजेशन, एंडोट्रैकेल ट्यूब की सफाई और IV लाइन को नियमित बदलवाना आवश्यक है।
नवजात और छोटे बच्चों को सर्दियों में नहलाने से बचाएं, बिना कपड़ों के खुले में न जाने दें, टीकाकरण और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें और उन्हें ठंड, धूल-धुएं और खांसी-जुकाम से दूर रखें। इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए स्वस्थ जीवन शैली अपनाएं, हरी सब्जियां और फल खाएं, फास्ट फूड से बचें और योग व प्राणायाम करें। इन सावधानियों से आप निमोनिया के खतरे को काफी हद तक कम कर सकते हैं और अपने परिवार को सुरक्षित रख सकते हैं।

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