बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में मायावती ने कहा कि प्रदेश में बसपा को कमजोर करने के लिए विरोधी दल योजनाबद्ध कोशिशें कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि पार्टी इन साजिशों के प्रति अपने कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को सतर्क करेगी, ताकि संगठन किसी भी चुनौती का मजबूती से सामना कर सके।
विरोधी दलों पर मायावती का हमला
मायावती ने विरोधी दलों पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि केंद्र और राज्य की सरकारें जनहित से जुड़े मुद्दों को नजरअंदाज कर रही हैं। उनका आरोप था कि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही जाति और धर्म के नाम पर राजनीति में उलझे हुए हैं, जिससे समाज में वैमनस्य बढ़ रहा है और यह देशहित के लिए घातक है। उन्होंने संसद में लगातार हो रहे हंगामे पर भी नाराजगी जाहिर की और कहा कि संसद चर्चा और समाधान के लिए होती है, लेकिन वहां केवल एक-दूसरे को नीचा दिखाने की होड़ लगी है।
जनमुद्दे हाशिए पर, जाति-धर्म राजनीति हावी
मायावती ने अमेरिका-भारत के प्रस्तावित ट्रेड डील का उदाहरण देते हुए कहा कि देश में किसानों, मजदूरों और अल्पसंख्यक समुदाय की स्थिति सुधारने के लिए ठोस प्रयास नहीं हो रहे। उन्होंने कहा कि टैरिफ जैसे अहम मुद्दों पर संसद में स्पष्ट स्थिति होनी चाहिए, लेकिन सत्ता पक्ष और विपक्ष गंभीर बहस के बजाय जाति-धर्म की राजनीति में उलझे हैं।
बैठक में प्रदेश और मंडल स्तर के पदाधिकारी और सभी 403 विधानसभा सीटों के अध्यक्ष शामिल हुए। इस दौरान संगठन की सालाना गतिविधियों, आगामी रणनीति और एसआईआर से जुड़े मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। मायावती ने बैठक को चुनावी तैयारी के लिहाज से अहम बताया और कहा कि अब उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में ज्यादा समय नहीं बचा है।