नई दिल्ली । अक्सर नहाते समय कपड़े धोते समय या स्विमिंग पूल में घंटों बिताने के बाद हम देखते हैं कि हमारे हाथ और पैरों की उंगलियों की त्वचा अजीब तरह से सिकुड़ गई है। इसे देखकर मन में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर पानी के संपर्क में आते ही शरीर ऐसा व्यवहार क्यों करता है मेडिकल भाषा में फिंगर्स प्रून कही जाने वाली यह स्थिति ज्यादातर सामान्य होती है, लेकिन कभी-कभी यह आपके शरीर के भीतर पनप रही किसी बीमारी का अलार्म भी हो सकती है।
क्यों आती हैं उंगलियों पर झुर्रियां
वैज्ञानिकों का मानना है कि पानी में उंगलियों का सिकुड़ना केवल एक भौतिक क्रिया नहीं बल्कि हमारे स्वायत्त तंत्रिका तंत्र की एक सोची-समझी प्रतिक्रिया है। जब हम लंबे समय तक पानी में रहते हैं तो मस्तिष्क नसों को संकेत भेजता है जिससे त्वचा के नीचे की रक्त कोशिकाएं सिकुड़ जाती हैं। ऐसा होने से उंगलियों की सतह पर झुर्रियां बन जाती हैं। दिलचस्प बात यह है कि यह झुर्रियां पानी के भीतर गीली चीजों पर बेहतर पकड़ बनाने में मदद करती हैं ठीक उसी तरह जैसे टायरों की ग्रिप सड़क पर फिसलने से बचाती है।
कब यह चिंता का विषय है
हालांकि पानी से बाहर आने के कुछ देर बाद उंगलियां सामान्य हो जाती हैं लेकिन अगर यह समस्या बिना पानी के भी हो रही है या लंबे समय तक बनी रहती है तो यह नीचे दी गई स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत हो सकती है डायबिटीज हाई ब्लड शुगर के कारण शरीर की पसीने की ग्रंथियां और तंत्रिकाएं प्रभावित होती हैं। इससे त्वचा की प्राकृतिक नमी खत्म हो जाती है और उंगलियों में समय से पहले या बार-बार सिकुड़न दिखने लगती है। यदि इसके साथ आपको अधिक प्यास लगना, धुंधली नजर या बार-बार पेशाब आने जैसी शिकायत है, तो शुगर की जांच जरूर कराएं।
विटामिन B12 की कमी: शरीर में विटामिन B12 की कमी नसों के कामकाज को प्रभावित करती है। इसकी कमी से उंगलियों में बेवजह सिकुड़न हाथों-पैरों में झुनझुनी, थकान और एनीमिया जैसी समस्याएं हो सकती हैं। शाकाहारी लोग इसकी पूर्ति के लिए दूध दही और पनीर का सेवन बढ़ा सकते हैं। डिहाइड्रेशन और थायराइड शरीर में पानी की भारी कमी होने पर त्वचा अपनी लोच खो देती है, जिससे वह झुर्रीदार दिखने लगती है। वहीं थायराइड विकार भी त्वचा के मेटाबॉलिज्म को प्रभावित कर उसे ड्राई और सिकुड़ा हुआ बना सकते हैं।
सावधानी कब बरतें
यदि उंगलियों के सिकुड़ने के साथ आपको निम्नलिखित लक्षण महसूस हों तो डॉक्टर से परामर्श लेना अनिवार्य है हाथों-पैरों में तेज दर्द या जकड़न। त्वचा का असामान्य रूप से मोटा होना। बिना पानी के संपर्क में आए ही उंगलियों का बार-बार सिकुड़ना। घाव भरने में देरी या बार-बार त्वचा संक्रमण।