बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के मानपुर बफर अंतर्गत खम्हा बीट क्षेत्र में एक अवयस्क नर भालू का शव मिलने की सूचना वन विभाग को मिली थी। सूचना मिलते ही वन अमला मौके पर पहुंचा और जांच शुरू की गई। डॉग स्क्वाड की मदद से आसपास के क्षेत्र में सर्च अभियान चलाया गया जिसके दौरान कुछ ही दूरी पर एक मादा भालू का शव भी बरामद किया गया। एक ही क्षेत्र में दो भालुओं की मौत से पूरे रिजर्व क्षेत्र में हड़कंप की स्थिति बन गई।
वन अमले ने दोनों शवों का बारीकी से निरीक्षण किया। जांच में पाया गया कि दोनों भालुओं के सभी अवयव सुरक्षित हैं और कहीं भी शिकार या अवैध गतिविधि के संकेत नहीं मिले हैं। घटनास्थल का संरक्षण कर पंचनामा तैयार किया गया। मेटल डिटेक्टर की सहायता से शवों की जांच की गई ताकि किसी प्रकार की धातु या गोली के निशान की पुष्टि हो सके। वाइल्डलाइफ हेल्थ ऑफिसर की मौजूदगी में दोनों भालुओं का पोस्टमॉर्टम किया गया और आवश्यक नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं।
प्राथमिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि दोनों भालुओं की मौत किसी अन्य वन्यप्राणी से हुए संघर्ष के कारण हुई हो सकती है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और लैब जांच के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि हो सकेगी। उल्लेखनीय है कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में पर्यटन के दौरान भालू अक्सर दिखाई देते हैं और उनका मूवमेंट बफर क्षेत्रों में अधिक रहता है।
इधर शहडोल जिले की जयसिंहनगर रेंज के वनचाचर बीट क्षेत्र में भी वन्यजीव संघर्ष की एक बड़ी घटना सामने आई है। यहां दो बाघों के बीच हुए संघर्ष के बाद एक नर बाघ गंभीर रूप से घायल हो गया था। सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम ने लगातार तीन दिनों तक सर्च और ट्रैकिंग अभियान चलाया। हाथियों की मदद से घायल बाघ को ट्रेस किया गया जिसके बाद रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया।
रेस्क्यू टीम ने सावधानीपूर्वक डार्ट गन की मदद से बाघ को बेहोश किया और मौके पर प्राथमिक उपचार दिया गया। इसके बाद घायल बाघ को बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के मगधी परिक्षेत्र स्थित बहेरहा बाड़े में सुरक्षित रखा गया है। वन विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम द्वारा बाघ का इलाज किया जा रहा है और उसकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।वन विभाग का कहना है कि दोनों घटनाओं को गंभीरता से लिया जा रहा है और वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।