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10 फाइनेंशियल मिस्टेक्स जो किसी को भी नहीं करनी चाहिए, समय रहते समझने में है समझदारी

नई दिल्ली। आज की तेज रफ्तार जिंदगी में कमाई बढ़ाना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है पैसों का सही प्रबंधन करना। अक्सर आर्थिक संकट बड़ी वजहों से नहीं, बल्कि रोजमर्रा की छोटी-छोटी वित्तीय गलतियों से पैदा होता है। अनियोजित खर्च, बढ़ता क्रेडिट कार्ड बिल, बिना योजना के बड़े खरीद फैसले और बचत की अनदेखी-ये सभी मिलकर वित्तीय स्थिरता को कमजोर कर देते हैं। अगर समय रहते इन आदतों पर नियंत्रण न किया जाए, तो अच्छी आय होने के बावजूद आर्थिक दबाव बना रह सकता है। आइए, यहां हम उन 10 गलतियों की चर्चा करते हैं, जिनसे हर किसी को बचना चाहिए।
गैर-जरूरी खर्च
कभी-कभार महंगी कॉफी, बाहर खाना या पेड मूवी ऑर्डर करना मामूली लग सकता है, लेकिन ये छोटे खर्च मिलकर बड़ा बोझ बन जाते हैं। मान लीजिए, अगर आप हर हफ्ते बाहर खाने पर 500 रुपये खर्च करते हैं, तो साल भर में यह 24000 रुपये हो जाता है। यह रकम छोटे-मोटे कर्ज चुकाने या सेविंग में लगाई जा सकती है। आर्थिक तंगी के समय ऐसे खर्चों से बचना बेहद जरूरी है।

बार-बार होने वाले नियमित खर्च
हर महीने या सालाना कटने वाले खर्चों पर नजर डालें- जैसे कई स्ट्रीमिंग सब्सक्रिप्शन या महंगे जिम मेंबरशिप। खुद से पूछें, क्या ये जरूरत हैं या सिर्फ चाहत? कई बार कम खर्च वाला विकल्प भी काम चला सकता है और आपको बचत का मौका दे सकता है।

क्रेडिट कार्ड का ज्यादा उपयोग
गैर-जरूरी चीजों के लिए क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल आम हो गया है। लेकिन अगर आप महीने के आखिर तक पूरा बकाया नहीं चुका पाते, तो ऊंची ब्याज दरें खरीदी गई वस्तुओं को बेहद महंगा बना देती हैं। कई बार क्रेडिट कार्ड के चलते लोग अपनी आय से ज्यादा खर्च कर बैठते हैं।

गाड़ी खरीदने में जल्दबाजी
हर साल लाखों नई गाड़ियां बिकती हैं, लेकिन बहुत कम लोग उन्हें नकद खरीद पाते हैं। लोन लेकर गाड़ी खरीदना आसान लगता है, लेकिन किस्त भर पाने की क्षमता और गाड़ी का वास्तविक खर्च उठाने की क्षमता अलग बातें हैं।

ध्यान रहे, गाड़ी एक घटती कीमत वाली संपत्ति है। उस पर ब्याज देना आर्थिक रूप से नुकसानदायक हो सकता है। बार-बार गाड़ी बदलना भी घाटे का सौदा साबित होता है। जरूरत के अनुसार गाड़ी का चुनाव ही समझदारी है। दिखावे के लिए महंगी SUV खरीदना बजट पर भारी पड़ सकता है।

घर पर जरूरत से ज्यादा खर्च
घर खरीदते समय “बड़ा ही बेहतर है” हमेशा सही नहीं होता। बड़ी प्रॉपर्टी का मतलब ज्यादा टैक्स, मेंटेनेंस और यूटिलिटी बिल। मॉर्गेज के अलावा अन्य नियमित खर्चों पर भी विचार करना जरूरी है। घर ऐसा हो, जो आपकी जरूरत और बजट दोनों के मुताबिक हो।

बार-बार रीफाइनेंसिंग करना
अगर आप घर की जरूरत के लिए बार-बार रीफाइनेंसिंग करते हैं तो यह जोखिम भरा हो सकता है। अगर कम ब्याज दर पर कर्ज चुकाने के लिए ऐसा किया जाए तो ठीक है, लेकिन इसका इस्तेमाल क्रेडिट कार्ड की तरह करना अनावश्यक ब्याज का कारण बन सकता है।

बचत न करना
कई परिवार “पेचेक टू पेचेक” जीवन जी रहे हैं। ऐसे में एक वेतन न मिलना भी संकट पैदा कर सकता है। आपातकालीन फंड का होना बेहद जरूरी है, खासकर आर्थिक मंदी जैसे समय में।

रिटायरमेंट के लिए निवेश न करना
अगर आपका पैसा निवेश के जरिए काम नहीं कर रहा, तो आरामदायक रिटायरमेंट मुश्किल हो सकता है। रिटायरमेंट खातों में नियमित निवेश लंबी अवधि में वित्तीय सुरक्षा देता है। इसलिए किसी अच्छी रिटायरमेंट स्कीम में अभी से निवेश की शुरुआत कर दें।

कर्ज चुकाने के लिए रिटायरमेंट फंड का इस्तेमाल
कुछ लोग ऊंचे ब्याज वाले कर्ज से बचने के लिए रिटायरमेंट फंड निकालने का सोचते हैं। ऐसा करने से कंपाउंडिंग का लाभ खत्म हो जाता है और तय वर्ष से कम उम्र में निकासी पर पेनल्टी भी लग सकती है। रिटायरमेंट फंड को छूना बिल्कुल आखिरी विकल्प होना चाहिए।

वित्तीय योजना का अभाव
आज के डिजिटल दौर में लोग घंटों मनोरंजन और सोशल मीडिया पर व्यतीत कर देते हैं, लेकिन अपने वित्तीय भविष्य की योजना बनाने के लिए समय नहीं निकालते। परिणामस्वरूप, आय और खर्च का सही आकलन नहीं हो पाता और बचत व निवेश की दिशा अस्पष्ट रह जाती है। बिना ठोस वित्तीय योजना के भविष्य अनिश्चित और असुरक्षित बन सकता है। इसलिए यह बेहद जरूरी है कि आप नियमित रूप से अपनी आय, खर्च, बचत और निवेश की समीक्षा करें और स्पष्ट वित्तीय लक्ष्य तय करें।

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