स्क्रीन के उजाले में बुझती युवा संवेदनाएं

– डॉ. संध्या एस चौकसे आज का भारत युवाओं का भारत है। यही युवा देश की रीढ़ हैं और भविष्य की नींव भी, किंतु विडंबना यह है कि जिन हाथों में कलम किताबें औजार और रचनात्मकता होनी चाहिए, उन्हीं हाथों में आज हर पल एक चमकती हुई स्क्रीन दिखाई देती है। मोबाइल फोन! जिसने दुनिया […]