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संजय कपूर की वसीयत विवाद में नया मोड़, करिश्मा कपूर के बच्चों और मां रानी कपूर को कोर्ट से राहत


नई दिल्ली: बॉलीवुड अभिनेता करिश्मा कपूर के बच्चों और दिवंगत व्यवसायी संजय कपूर की मां रानी कपूर को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। यह राहत उस विवादित वसीयत से जुड़ी है, जिसमें संजय कपूर की कथित संपत्ति लगभग 30,000 करोड़ रुपये बताई गई है। परिवार में लंबे समय से इस वसीयत की प्रामाणिकता को लेकर विवाद जारी था और अब कोर्ट ने इसके फॉरेंसिक जांच की अनुमति दे दी है।

कोर्ट के आदेश के अनुसार, यह जांच 10 मार्च को होगी और एक्सपर्ट्स वसीयत की बारीकी से जांच करेंगे। वसीयत फिलहाल कोर्ट की सुरक्षित कस्टडी में सीलबंद लिफाफे में रखी गई है। जांच के दौरान किसी को भी इसकी फोटो या कॉपी लेने की अनुमति नहीं होगी।

यह विवाद उस वसीयत को लेकर है, जिसमें कथित रूप से संजय कपूर की संपत्ति उनकी पत्नी प्रिया कपूर और उनके बच्चे के नाम कर दी गई थी। करिश्मा कपूर के दोनों बच्चों और संजय की मां रानी कपूर ने इस दावे को चुनौती दी थी और अदालत से फॉरेंसिक जांच की मांग की थी, ताकि यह साबित किया जा सके कि वसीयत असली है या नहीं।

संजय कपूर की विधवा प्रिया कपूर ने इस जांच का विरोध किया था। उनके वकीलों का कहना था कि अभी इस तरह की जांच की जरूरत नहीं है। लेकिन अदालत ने उनकी दलीलों को खारिज कर दिया और स्पष्ट किया कि जांच के दौरान प्रिया के वकील मौजूद रह सकते हैं, लेकिन दस्तावेज की कोई भी फोटो या कॉपी ले जाने की अनुमति नहीं होगी।

जॉइंट रजिस्ट्रार गगनदीप जिंदल ने 26 फरवरी को आदेश दिया कि करिश्मा और रानी कपूर अपने हैंडराइटिंग एक्सपर्ट्स के साथ 10 मार्च दोपहर 3 बजे इस मूल वसीयत की जांच कर सकते हैं। इस प्रक्रिया के दौरान सभी पक्षों की मौजूदगी सुनिश्चित की जाएगी, ताकि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ हो सके।

इस फैसले के साथ ही करिश्मा कपूर के बच्चों और रानी कपूर को कानूनी लड़ाई में बड़ा फायदा मिला है। यह कदम इस विवाद को सुलझाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। अब सबकी निगाहें 10 मार्च पर टिकी हैं, जब एक्सपर्ट्स वसीयत का बारीकी से विश्लेषण करेंगे और इसका असली रूप सामने आएगा।

इस मामले ने बॉलीवुड और कारोबार जगत में खूब चर्चा बटोरी है, क्योंकि 30,000 करोड़ रुपये की संपत्ति और परिवार के बीच लंबा विवाद इसे बेहद संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल बना देता है। कोर्ट द्वारा फॉरेंसिक जांच की अनुमति मिलने के बाद अब यह स्पष्ट होने की संभावना है कि वसीयत वास्तविक है या इसमें किसी तरह की अनियमितता है।

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