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अमेरिका-ईरान-इज़रायल टकराव आठवें दिन में, मिसाइल और ड्रोन हमलों से क्षेत्रीय तनाव बढ़ा


नई दिल्ली । अमेरिका इज़रायल और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है और यह संघर्ष अब आठवें दिन में प्रवेश कर चुका है। इसी दौरान इज़रायल ने हमलों का नया दौर शुरू किया जबकि तेहरान के एक प्रमुख वाणिज्यिक हवाई अड्डे पर विस्फोटों की खबरें सामने आईं।

यह टकराव 28 फरवरी को तेहरान में हुए एक हमले से शुरू हुआ था। शुरुआती दौर में यह केवल हवाई हमलों और जवाबी कार्रवाइयों तक सीमित था लेकिन अब खाड़ी क्षेत्र में ड्रोन हमलों सहित व्यापक संघर्ष का रूप ले चुका है। यह संकट धीरे धीरे और व्यापक रूप ले रहा है जिससे पूरे क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता पर असर पड़ रहा है।

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस संकट पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ तब तक कोई समझौता नहीं होगा जब तक वह बिना शर्त आत्मसमर्पण नहीं करता। इसके अलावा उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे आत्मसमर्पण के बाद ईरान को नया नेतृत्व चुनने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए जो उनके प्रशासन के लिए स्वीकार्य हो।

कुवैत की सेना ने बताया कि उसने अपने वायु रक्षा तंत्र के माध्यम से कई संभावित खतरों को रोक दिया। शनिवार सुबह से शुरू हुई हमलों की कई लहरों में 12 ईरानी ड्रोन और 14 बैलिस्टिक या क्रूज़ मिसाइलों को मार गिराया गया। इन हमलों से कई हिस्सों में विस्फोटों की आवाज़ें सुनी गईं लेकिन अधिकारियों के अनुसार केवल मामूली संपत्ति को नुकसान हुआ जो मिसाइलों के मलबे गिरने से हुआ।

उधर इज़रायल डिफेंस फोर्सेज आईडीएफ ने उत्तरी इज़रायल के निवासियों को सूचित किया कि हालिया ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल प्रक्षेपण से उनका क्षेत्र सीधे खतरे में नहीं है इसलिए बम शेल्टर से बाहर निकल सकते हैं। चेतावनी सायरन भी नहीं बजे।

हालांकि इसके बाद आईडीएफ ने तेल अवीव मध्य इज़रायल और वेस्ट बैंक के निवासियों के लिए नया अलर्ट जारी किया। इज़रायली सेना ने ईरान की ओर से एक और मिसाइल प्रक्षेपण का पता लगाया जिससे पहले से अस्थिर क्षेत्रीय टकराव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार इस संघर्ष के बढ़ने से खाड़ी क्षेत्र और मध्य पूर्व की सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है। तेल आपूर्ति व्यापार मार्ग और नागरिक सुरक्षा पर इसका सीधा प्रभाव पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें अब अमेरिका इज़रायल और ईरान के बीच कूटनीतिक प्रयासों और किसी संभावित समझौते पर टिकी हैं।

क्षेत्रीय देशों ने भी सुरक्षा सतर्कता बढ़ा दी है। कुवैत ने अपने वायु रक्षा तंत्र को सक्रिय रखा है और इज़रायल लगातार मिसाइल और ड्रोन गतिविधियों की निगरानी कर रहा है। इस बीच आम नागरिकों में भय और अनिश्चितता भी बढ़ रही है क्योंकि किसी भी समय टकराव की सीमा पार करने का खतरा बना हुआ है।

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