घटना की खबर सुनते ही उनके पिता अशोक अग्रवाल को हार्ट अटैक आया और उन्हें अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि आग को बुझाने के लिए फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर पहुंच गईं लेकिन पाइप कई जगह से फटे हुए थे और पानी का बड़ा हिस्सा सड़क पर बहता रहा। कुछ स्थानीय लोग ईंट पत्थर लगाकर पाइप की लीकेज को बंद करने की कोशिश करते रहे। कई गाड़ियों में पानी का प्रेशर कम होने के कारण आग पर काबू पाने में लगातार देरी होती रही।
बालाबाई बाजार का इलाका संकरा होने के कारण फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को अंदर तक पहुंचने में भी समस्या आई। खराब पाइप लीकेज और कम प्रेशर वाली गाड़ियों ने आग बुझाने की प्रक्रिया को और धीमा कर दिया। नतीजतन आग को काबू में करने में सात घंटे से ज्यादा का समय लग गया। फायर ब्रिगेड की 10 से अधिक गाड़ियों के साथ टैंकरों से भी पानी मंगाया गया। अपर आयुक्त प्रदीप तोमर के अनुसार 35 से अधिक फायर ब्रिगेड गाड़ियों का पानी आग बुझाने में इस्तेमाल हुआ। एसडीआरएफ की टीम भी राहत कार्य में लगी रही।
मध्य प्रदेश चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष प्रवीण अग्रवाल ने कहा कि अगर पहली फायर ब्रिगेड की गाड़ी पूरी तरह से कार्यशील होती तो आग को शुरुआती समय में ही नियंत्रित किया जा सकता था।कलेक्टर रुचिका चौहान ने कहा कि फायर ब्रिगेड वाहनों की नियमित सर्विसिंग और टेस्टिंग जरूरी है। उन्होंने नगर निगम आयुक्त को जानकारी देने और फायर ब्रिगेड व्यवस्थाओं की जांच कराने के निर्देश दिए। इस हादसे ने ग्वालियर में फायर ब्रिगेड की तैयारियों पर सवाल उठाए हैं और शहर में आपातकालीन प्रतिक्रिया में सुधार की आवश्यकता को स्पष्ट कर दिया।