श्याम श्रीवास्तव ने कहा कि दिव्यांग पेंशन उन सैनिकों को दी जाती है, जो युद्ध, ऑपरेशन या ड्यूटी के दौरान गंभीर रूप से घायल होकर दिव्यांग हो जाते हैं। यह पेंशन उनकी मुख्य पेंशन का एक निर्धारित हिस्सा होती है, जो उनके जीवन-यापन और इलाज में मदद करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अब इस दिव्यांग पेंशन पर भी इनकम टैक्स लगाने की तैयारी कर रही है, जो 30 प्रतिशत तक हो सकता है। श्रीवास्तव ने कहा कि 1922 में बने पहले इनकम टैक्स कानून में स्पष्ट प्रावधान था कि ऐसे सैनिकों की पेंशन पर कोई टैक्स नहीं लगेगा, लेकिन करीब 100 साल बाद सरकार ने उस पर भी टैक्स लगाने का फैसला कर लिया है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर सरकार पूर्व सैनिकों की पेंशन पर टैक्स लगाकर कितना राजस्व जुटा लेगी, जबकि इससे सैनिकों का मनोबल जरूर टूटेगा।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व सैनिकों के लिए चल रही एक्स-सर्विसमैन कॉन्ट्रिब्यूटरी हेल्थ स्कीम (ECHS) की स्थिति पर भी गंभीर चिंता जताई गई। श्रीवास्तव ने कहा कि यह योजना पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को कैशलेस इलाज उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई थी, लेकिन हाल के समय में बजट की कमी के कारण इसकी हालत खराब होती जा रही है। उनका आरोप है कि कई निजी अस्पतालों के बिल महीनों से लंबित पड़े हैं, जिसके कारण कई अस्पतालों ने पूर्व सैनिकों का इलाज करना बंद कर दिया है। इससे हजारों पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को इलाज के लिए परेशान होना पड़ रहा है।
रिटायर्ड मेजर जनरल ने सेना में लागू अग्निवीर योजना को भी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरनाक प्रयोग बताया। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत युवाओं की चार साल के लिए अस्थायी भर्ती की जाती है और बाद में 75 प्रतिशत जवानों को सेवा से बाहर कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि जिन युवाओं को चार साल बाद वापस भेज दिया जाएगा, उन्हें न तो पेंशन मिलेगी, न ग्रेच्युटी और न ही शहीद होने पर मिलने वाली सुविधाएं। उन्होंने आशंका जताई कि यदि यही व्यवस्था जारी रही तो आने वाले 8 से 10 वर्षों में सेना में स्थायी सैनिकों की संख्या लगातार घटती जाएगी और अग्निवीरों की संख्या बढ़ती जाएगी।
श्याम श्रीवास्तव के अनुसार वर्तमान में भारतीय सेना में करीब 14 लाख सैनिक हैं, लेकिन यदि नियमित भर्ती कम होती रही और अग्निवीरों की संख्या बढ़ती गई, तो भविष्य में केवल लगभग साढ़े तीन लाख स्थायी सैनिक ही रह जाएंगे, जो पूरी तरह प्रशिक्षित और युद्ध के लिए तैयार होंगे। उन्होंने मांग की कि सभी अग्निवीरों को नियमित सेवा में शामिल किया जाए ताकि युवाओं का भविष्य सुरक्षित रह सके।
इसके अलावा उन्होंने मध्य प्रदेश में पूर्व सैनिकों के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में तृतीय श्रेणी की नौकरियों में 10 प्रतिशत और चतुर्थ श्रेणी में 20 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है, लेकिन चयन प्रक्रिया में इसका सही लाभ पूर्व सैनिकों को नहीं मिल पाता। उनका कहना है कि यदि आरक्षण का सही तरीके से पालन हो, तो पुलिस, राजस्व और अन्य विभागों में बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक अपनी सेवाएं दे सकते हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने हाल के वर्षों में कुछ राज्यों में सैनिकों और पूर्व सैनिकों के साथ पुलिस द्वारा कथित दुर्व्यवहार की घटनाओं की भी कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि जो लोग देश की सुरक्षा के लिए अपनी जान जोखिम में डालते हैं, उनके साथ इस तरह का व्यवहार किसी भी हालत में स्वीकार्य नहीं है। पूर्व सैनिकों ने सरकार से मांग की है कि दिव्यांग पेंशन पर लगाए गए टैक्स के फैसले को तुरंत वापस लिया जाए और सैनिकों से जुड़े सभी मुद्दों पर गंभीरता से विचार किया जाए।