बैठक के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि यह चर्चा मुख्यतः सरसों और तुअर की फसल से संबंधित रही। लंबे समय से लंबित सरसों की खरीद पर भावांतर भुगतान योजना को हरी झंडी दे दी गई है। इसका लाभ सीधे किसानों के बैंक खातों में मिलेगा और यह उनके लिए बड़ी राहत साबित होगी। इससे प्रदेश के लाखों सरसों उत्पादक किसानों को बाजार मूल्य और समर्थन मूल्य के अंतर की राशि मिल सकेगी।
इसके अलावा, तुअर की पूरी फसल 100 प्रतिशत सरकारी खरीद के तहत खरीदी जाएगी। शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री को इस योजना का स्वीकृति पत्र भी सौंपा। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम मध्य प्रदेश के दलहन उत्पादन क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा और किसानों की आय बढ़ाने में मदद करेगा।
दिल्ली में हुई इस बैठक की पृष्ठभूमि में एमपी विधानसभा का हालिया बजट सत्र भी रहा। सत्र के दौरान मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बयानों से सीएम और उनके बीच अंदरूनी मतभेद नजर आए थे। इसके बाद पिछले हफ्ते सीएम मोहन यादव, कैलाश विजयवर्गीय और प्रहलाद पटेल ने अलग-अलग समय पर केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। हालांकि इस बार कैलाश विजयवर्गीय निजी कार्यक्रम में व्यस्त रहे और बैठक में शामिल नहीं हो पाए।
बैठक में यह भी तय किया गया कि वर्ष 2026 को ‘किसान कल्याण वर्ष’ के रूप में मनाया जाएगा। इसमें मध्य प्रदेश को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। इस वर्ष में मूंग, उड़द, सोयाबीन और अन्य तिलहनों पर विशेष फोकस रहेगा। सरकार किसानों के लिए योजनाओं की प्रभावी क्रियान्वयन और बेहतर निगरानी भी सुनिश्चित करेगी।
शिवराज-मोहन-प्रहलाद की यह बैठक किसानों के हितों के लिए मील का पत्थर मानी जा रही है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि भावांतर भुगतान योजना और तुअर की पूरी सरकारी खरीद से किसान आर्थिक रूप से सशक्त होंगे और राज्य में दलहन उत्पादन में तेजी आएगी।
प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार मिलकर किसानों की आय बढ़ाने, फसल की सही कीमत सुनिश्चित करने और उत्पादन को प्रोत्साहित करने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। यह बैठक किसानों के लिए वास्तविक राहत और लंबे समय से प्रतीक्षित निर्णयों का परिणाम साबित होगी।